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15 साल पुराने विष्णु हत्याकांड में बड़ा फैसला, पूर्व विधायक बाली पहलवान समेत 7 को उम्रकैद

रोहतक के कलानौर अनाज मंडी में 2011 में हुई फायरिंग और विष्णु की हत्या का मामला आखिरकार अदालत के फैसले तक पहुंचा। करीब डेढ़ दशक चली कानूनी लड़ाई के बाद पूर्व विधायक बलबीर उर्फ बाली पहलवान समेत सात दोषियों को आजीवन कारावास मिला, जिससे परिवार ने राहत की सांस ली।

चंदे को लेकर विवाद से शुरू हुआ मामला

मामला 5 मई 2011 का है। गांव बसाना निवासी पूर्व सरपंच सीताराम की कलानौर अनाज मंडी स्थित दुकान पर कुछ लोग गौशाला के नाम पर चंदा मांगने पहुंचे थे। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने दोनों पक्षों को अलग कर दिया था।

अगले दिन मंडी में हुई फायरिंग

आरोप के मुताबिक, अगले दिन महम के पूर्व विधायक बलबीर उर्फ बाली पहलवान कुछ लोगों के साथ कलानौर अनाज मंडी पहुंचे। इसी दौरान फायरिंग हुई। गोली सीताराम के साले विष्णु को लग गई। गंभीर रूप से घायल विष्णु की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने हत्या समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

15 साल पुराने विष्णु हत्याकांड में बड़ा फैसला, पूर्व विधायक बाली पहलवान समेत 7 को उम्रकैद

करीब 15 साल चली कानूनी लड़ाई

इस मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली। अतिरिक्त सत्र न्यायालय में गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों पर सुनवाई के बाद अदालत ने बाली पहलवान समेत सात आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मामले में IPC की धारा 302, 307, 323, 107, 148 और 149 के तहत कार्रवाई हुई थी।

आर्म्स एक्ट के तहत भी कार्रवाई

मामले में दिनेश, सुनील और बलबीर उर्फ बाली पहलवान के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 25 भी शामिल थी। यानी मामला केवल हत्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कथित हथियारों से जुड़े आरोपों पर भी कानूनी कार्रवाई हुई।

परिवार ने कहा- आखिरकार मिला न्याय

फैसले के बाद शिकायतकर्ता सीताराम ने अदालत के निर्णय पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि लगभग 15 साल के लंबे इंतजार के बाद परिवार को न्याय मिला है। इतने वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आया फैसला परिवार के लिए भावनात्मक रूप से बेहद अहम रहा।

मुआवजे का भी प्रावधान

पीड़ित पक्ष के वकील तेजवीर अहलावत के अनुसार, अदालत की ओर से लगाए गए कंपनसेशन में से दो लाख रुपये पीड़ित परिवार को दिए जाएंगे। परिवार ने फैसले को न्याय की दिशा में बड़ी जीत बताया है। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि गंभीर आपराधिक मामलों में न्याय की प्रक्रिया भले लंबी हो, लेकिन अदालत का अंतिम फैसला पीड़ित परिवार के लिए बड़ी राहत बन सकता है।

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