
जम्मू कश्मीर में एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई सामने आई है जहां अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी शुक्रवार शाम को की गई और इसके बाद उन्हें दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। अदालत से तीन दिनों की ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद एजेंसी उन्हें जम्मू कश्मीर लेकर गई। इस अचानक हुई कार्रवाई ने राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में हलचल मचा दी है क्योंकि यह मामला कोई नया नहीं बल्कि तीन दशक पुराना है।
30 साल पुराने मामले में फिर घिरे शब्बीर शाह
शब्बीर शाह की यह गिरफ्तारी 1996 में हुए एक हमले से जुड़ी है जिसमें पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया गया था। इस मामले में उन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। खास बात यह है कि हाल ही में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से एक अन्य मामले में जमानत मिली थी और कुछ ही दिन पहले प्रवर्तन निदेशालय के मामले में भी अदालत से राहत मिली थी। ऐसे में उनकी दोबारा गिरफ्तारी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला अब फिर से चर्चा में आ गया है और आने वाले दिनों में इसकी जांच और भी तेज होने की संभावना है।

कश्मीर की राजनीति में बड़ा और विवादित नाम
शब्बीर अहमद शाह का नाम जम्मू कश्मीर की राजनीति में लंबे समय से जुड़ा रहा है। उन्हें एक प्रमुख अलगाववादी नेता के रूप में जाना जाता है और उनकी गतिविधियां हमेशा चर्चा का विषय रही हैं। साल 1953 में जन्मे शब्बीर शाह का झुकाव बचपन से ही राजनीति की ओर था। समय के साथ उन्होंने कश्मीर के मुद्दों को लेकर अपनी अलग सोच विकसित की और इसी वजह से वे अलगाववादी विचारधारा के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। उनका मानना रहा है कि कश्मीर के लोगों को अपने भविष्य का निर्णय खुद लेने का अधिकार होना चाहिए।
संगठन के जरिए विचारों का विस्तार और आगे की स्थिति
शब्बीर शाह ने डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी नाम का संगठन बनाया जिसके जरिए उन्होंने अपने विचारों को आगे बढ़ाने का काम किया। यह संगठन कश्मीर में अलगाववादी सोच को फैलाने के लिए जाना जाता रहा है। वर्षों तक उन्होंने इस संगठन के माध्यम से सक्रिय भूमिका निभाई और कई बार कानूनी विवादों में भी फंसे। अब एक बार फिर उनकी गिरफ्तारी ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। आने वाले समय में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और अदालत के फैसले पर सबकी नजर बनी रहेगी।
