रुपये में मामूली मजबूती के बावजूद बाजार क्यों हुआ लाल निशान में बंद

गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार में पिछले सत्र की तेजी के बाद मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिला और बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 122.56 अंक टूटकर 77,988.68 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 34.55 अंक की गिरावट के साथ 24,196.75 पर टिक गया। दिनभर के कारोबार में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा और शुरुआती मजबूती के बावजूद इंडेक्स ऊपरी स्तरों पर टिक नहीं सका। निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया और अंत में दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए।
बैंकिंग और आईटी शेयरों में दबाव तो कुछ सेक्टर्स में बढ़त
निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज करने वाले शेयरों में एचडीएफसी बैंक, ओएनजीसी, एचडीएफसी लाइफ, टाइटन कंपनी और अपोलो हॉस्पिटल शामिल रहे। इन प्रमुख शेयरों में बिकवाली के कारण इंडेक्स पर दबाव बढ़ गया। वहीं दूसरी ओर कुछ शेयरों ने बाजार को सहारा देने की कोशिश की और बढ़त दर्ज की। हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, ट्रेंट, अदानी एंटरप्राइजेज, अदानी पोर्ट्स और इटरनल जैसे स्टॉक्स में खरीदारी देखने को मिली। सेक्टर आधारित प्रदर्शन की बात करें तो बाजार में चयनात्मक तेजी और गिरावट का मिश्रण नजर आया जिससे कुल मिलाकर इंडेक्स दबाव में रहा।

विशेषज्ञों की राय और वैश्विक संकेतों का असर
रिसर्च एनालिस्ट और लाइवलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक हरिप्रसाद के अनुसार बाजार ने शुरुआत में वैश्विक सकारात्मक संकेतों और भू-राजनीतिक तनाव में कमी के चलते मजबूती दिखाई थी। लेकिन दिन बढ़ने के साथ मुनाफावसूली हावी हो गई और इंडेक्स अपनी शुरुआती बढ़त बनाए नहीं रख सका। उन्होंने कहा कि बाजार की धारणा अभी भी पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर काफी संवेदनशील बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत को लेकर उम्मीदों ने कच्चे तेल की कीमतों को कुछ हद तक नियंत्रित किया जिससे महंगाई को लेकर चिंता थोड़ी कम हुई। हालांकि निवेशकों का रुख अभी भी सतर्क बना हुआ है और वे आक्रामक खरीदारी से बच रहे हैं।
निफ्टी का तकनीकी स्तर और रुपये में मामूली मजबूती
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के लिए 24,320 से 24,350 का स्तर अहम रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है। यदि इंडेक्स इस स्तर को मजबूती से पार करता है तो यह 24,500 तक और उसके बाद 24,650 तक पहुंच सकता है। वहीं नीचे की ओर 24,080 से 24,050 का स्तर मजबूत सपोर्ट के रूप में काम कर सकता है। दूसरी ओर विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 10 पैसे मजबूत होकर 93.23 पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक संकेतों ने रुपये को सहारा दिया, हालांकि डॉलर की मांग और विदेशी पूंजी के बहिर्वाह ने इसकी तेजी को सीमित रखा। इंटरबैंक बाजार में दिनभर रुपये में उतार-चढ़ाव देखा गया लेकिन अंत में यह मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ।