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सत्य निकेतन हादसे में कोर्ट का बड़ा फैसला, महेश गुप्ता और ठेकेदार सनोज 14 दिन न्यायिक हिरासत में

दिल्ली के सत्य निकेतन पीजी बिल्डिंग हादसे में पटियाला हाउस कोर्ट ने आरोपियों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। बिल्डिंग मालिक के बेटे और लेबर कॉन्ट्रैक्टर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जबकि दो पीजी ऑपरेटरों की पुलिस कस्टडी बढ़ाई गई है।

दो आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने बिल्डिंग मालिक के बेटे महेश गुप्ता और लेबर कॉन्ट्रैक्टर सनोज को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। महेश गुप्ता इस इमारत की मालकिन उर्मिला के बेटे बताए गए हैं।

दोनों की दो दिन की पुलिस कस्टडी पूरी होने के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया था। सुनवाई के बाद कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

दो PG ऑपरेटरों की पुलिस कस्टडी

मामले में आरोपी पीजी ऑपरेटर सुधांशु और शुभम त्यागी को अदालत ने दो दिनों की पुलिस कस्टडी में भेजा है। पुलिस दोनों से हादसे से जुड़े पहलुओं और इमारत में चल रहे पीजी संचालन को लेकर पूछताछ करेगी।

शुभम त्यागी को लेकर पुलिस ने कोर्ट को बताया कि मकान मालिक हरिराम गुप्ता ने इमारत का एक फ्लोर उसे लीज पर दे रखा था। इसी आधार पर पुलिस ने पूछताछ के लिए उसकी कस्टडी मांगी थी।

सत्य निकेतन हादसे में कोर्ट का बड़ा फैसला, महेश गुप्ता और ठेकेदार सनोज 14 दिन न्यायिक हिरासत में

फरार आरोपी ने कोर्ट में किया सरेंडर

सत्य निकेतन हादसे के मामले में आरोपी शुभम त्यागी ने अदालत के सामने सरेंडर भी किया। इसके बाद कोर्ट ने उसे दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इमारत में मरम्मत और पीजी संचालन से जुड़ी जिम्मेदारियां किसकी थीं और हादसे से पहले सुरक्षा मानकों का कितना पालन किया गया था।

सात लोगों की गई थी जान

दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर के पास स्थित सत्य निकेतन में 6 सितंबर को पांच मंजिला इमारत मरम्मत कार्य के दौरान ढह गई थी। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी, जबकि करीब 12 लोग घायल हुए थे।

इमारत का इस्तेमाल लड़कों के लिए पेइंग गेस्ट यानी पीजी आवास के तौर पर किया जा रहा था। हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान चलाया गया था।

अग्रिम जमानत की अर्जी भी खारिज

इस मामले में अदालत ने एक आरोपी की अग्रिम जमानत अर्जी भी खारिज कर दी है। पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप लाल ने पीजी संचालकों में कथित तौर पर शामिल शुभम त्यागी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की।

अदालत का यह फैसला मामले में आरोपियों की कानूनी मुश्किलें बढ़ने के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ हादसे की जिम्मेदारी और लापरवाही से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

जांच में सामने आएगा हादसे का जिम्मेदार कौन

सत्य निकेतन हादसे के बाद इमारत की संरचना, मरम्मत कार्य, पीजी संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे हैं। अब पुलिस की जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि निर्माण या मरम्मत कार्य में किन नियमों का पालन किया गया था और हादसे के लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।

चार आरोपियों के खिलाफ अदालत की ओर से अलग-अलग आदेशों के बाद अब जांच एजेंसियों को मामले से जुड़े तथ्यों को जोड़कर आगे की कार्रवाई करनी होगी।

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