109 साल पुराने MLA स्कूल के भविष्य पर जाटोली में मंथन, भवन बचाने की उठी मांग

जाटोली में करीब 109 वर्ष पुराने एमएलए वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के भविष्य और उसके भवन के समुचित उपयोग को लेकर रविवार को विद्यालय परिसर में बैठक हुई। हेलीमंडी नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष जगदीश सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्रामीणों ने विद्यालय भवन के संरक्षण और समाजहित में उपयोग के लिए हर स्तर पर आवाज उठाने का निर्णय लिया।
1917 में हुई थी विद्यालय की स्थापना
ग्रामीणों के अनुसार प्रसिद्ध संत स्वामी प्रेमानंद ने वर्ष 1917 में इस विद्यालय की स्थापना की थी। करीब सात एकड़ में फैले परिसर में 45 से अधिक कमरे हैं। कभी यहां तीन हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ते थे। परिसर में प्राथमिक विद्यालय, वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, डीएड महाविद्यालय और औषधालय जैसी संस्थाएं भी संचालित होती थीं।
स्कूल बंद हुआ, फिर दोबारा शुरू किया गया
विद्यालय की स्थिति समय के साथ बदलती गई। वर्ष 2017 में सहायता प्राप्त विद्यालय की व्यवस्था समाप्त होने के बाद आर्थिक जिम्मेदारी प्रबंधन समिति पर आ गई। आर्थिक बोझ और अन्य नीतिगत कारणों से वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का संचालन प्रभावित हुआ और यह 2023 में बंद हो गया। हालांकि 2024 में इसे दोबारा शुरू किया गया।

अब करीब 150 विद्यार्थी पढ़ रहे
प्रबंधकीय समिति के अध्यक्ष रमेश गर्ग के मुताबिक विद्यार्थियों की संख्या कम होने के कारण विद्यालय बंद हुआ था। नई समिति ने इसे दोबारा शुरू किया है और वर्तमान में करीब 150 विद्यार्थी यहां शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। परिसर में प्राथमिक विद्यालय और डीएड महाविद्यालय भी संचालित हो रहे हैं, जबकि पुराना औषधालय फिलहाल बंद है।
भवन के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग सुझाव
बैठक में विद्यालय परिसर के भविष्य को लेकर कई सुझाव सामने आए। कुछ ग्रामीणों ने यहां तकनीकी महाविद्यालय शुरू करने का प्रस्ताव रखा, जबकि कुछ लोगों ने भवन और परिसर को सरकार को सौंपने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि इस विद्यालय के लिए जाटोली के लोगों ने भूमि दान की थी, इसलिए इसका उपयोग समाज के व्यापक हित में होना चाहिए।
प्रबंधन समिति के अधिकार पर भी चर्चा
विद्यालय प्रबंधन समिति ने स्पष्ट किया कि निर्वाचित प्रबंधकीय समिति नियमानुसार केवल विद्यालय के संचालन की व्यवस्था देख सकती है। उसके पास भवन को किसी दूसरी संस्था को हस्तांतरित करने का अधिकार नहीं है। वहीं नगर परिषद अध्यक्ष प्रवीण ठाकुरिया ने इस मामले को सरकार और वरिष्ठ नेताओं के समक्ष उठाने का आश्वासन दिया।
सीवर का पानी भी बना बड़ी समस्या
बैठक में विद्यालय परिसर में जमा हो रहे सीवर के गंदे पानी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। ग्रामीणों के अनुसार करीब पांच वर्षों से यह समस्या बनी हुई है। उन्होंने दूसरे गांवों का सीवर पानी शोधन संयंत्र तक लाने का विरोध करते हुए स्थायी समाधान की मांग की। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर है।एक सदी से अधिक पुराना यह विद्यालय केवल एक भवन नहीं, बल्कि जाटोली की शैक्षणिक विरासत का हिस्सा है। इसके भविष्य को लेकर लिए जाने वाले फैसले में इतिहास, वर्तमान जरूरतों और आने वाली पीढ़ियों के हित—तीनों का संतुलन अहम रहेगा।
