
नेपाल के रसुवा में आई भीषण बाढ़ ने तबाही का मंजर खड़ा कर दिया है। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के बीच बिहार में भी गंडक नदी का जलप्रवाह बढ़ने की आशंका है। संभावित खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने तटबंधों, बांधों और संवेदनशील इलाकों की निगरानी तेज कर दी है।
नेपाल की तबाही ने बढ़ाई चिंता
नेपाल के रसुवा इलाके में अचानक आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 46 लोगों की मौत हुई है और 350 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनमें विदेशी नागरिक और भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं। नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
बिहार में गंडक को लेकर सतर्कता
नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में फ्लैश फ्लड की स्थिति का असर बिहार की नदियों पर पड़ सकता है। खासतौर पर गंडक नदी में अचानक जलप्रवाह बढ़ने की आशंका ने प्रशासन की चिंता बढ़ाई है। इसी को देखते हुए बिहार सरकार ने संभावित प्रभावित जिलों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं।

अमित शाह ने सीएम से की बात
संभावित संकट को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से फोन पर बात की। केंद्र की ओर से हर संभव सहायता का भरोसा दिया गया है। आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ को भी मोबिलाइज किया जा रहा है।
छह जिलों पर विशेष नजर
सरकार ने पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली समेत संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने को कहा है। अधिकारियों को तटबंधों और बांधों की लगातार जांच करने तथा कमजोर हिस्सों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
रात में भी होगी निगरानी
मुख्यमंत्री ने तटबंधों पर विशेष नाइट पेट्रोलिंग कराने को कहा है। संवेदनशील इलाकों में लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को संभावित खतरे की जानकारी देने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीमों को भी तैयार रखा गया है।
105 भारतीय पर्यटक लापता
नेपाल टूरिज्म बोर्ड के अनुसार, बाढ़ के बाद 291 विदेशी नागरिकों के लापता होने की सूचना है, जिनमें कम से कम 105 भारतीय पर्यटक शामिल हैं। नेपाल सेना हेलीकॉप्टरों की मदद से खोज और बचाव अभियान चला रही है। ऐसे में बिहार के लिए भी अगले कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं।
बाढ़ का खतरा केवल नदी किनारे बसे गांवों तक सीमित नहीं होता। समय रहते चेतावनी, मजबूत तटबंध और प्रशासनिक तैयारी ही बड़े नुकसान को रोक सकती है। फिलहाल बिहार में सतर्कता और त्वरित कार्रवाई सबसे बड़ी जरूरत है।
