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डिजिटल अरेस्ट कर रिटायर्ड अधिकारी से ठगे 2.21 करोड़, साइबर ठगों के नेटवर्क का खुलासा

गाजियाबाद के वसुंधरा निवासी केंद्र सरकार के सेवानिवृत्त अधिकारी रत्नाकर मुगशुजी गेडाम साइबर ठगों के निशाने पर आ गए।

आरोपियों ने 27 मार्च को उन्हें फोन कर बताया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के मामलों में किया गया है। इसके बाद उन्हें ईडी और सुप्रीम कोर्ट से वारंट जारी होने का डर दिखाया गया।

फर्जी वारंट भेजकर बनाया डिजिटल अरेस्ट

ठगों ने पीड़ित को विश्वास में लेने के लिए फर्जी दस्तावेज और वारंट उनके व्हाट्सएप पर भेजे। इसके बाद जांच के नाम पर उन्हें लगातार निगरानी में रखा गया।

पुलिस के मुताबिक, 27 मार्च से 14 मई के बीच अलग-अलग बैंक खातों में कुल 2.21 करोड़ रुपये ट्रांसफर कराए गए। शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

छह लाख रुपये लेने वाला आरोपी गिरफ्तार

जांच के दौरान पुलिस ने पानीपत निवासी महताब को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, ठगी की रकम में से छह लाख रुपये महताब के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे।

महताब ने चेक के जरिए रकम निकाली और इसके बदले उसे 17 हजार रुपये कमीशन दिया गया। पुलिस ने उसके पास से घटना में इस्तेमाल मोबाइल फोन भी बरामद किया है।

खाते का इस्तेमाल गेमिंग के नाम पर कराया

पूछताछ में महताब ने पुलिस को बताया कि पानीपत निवासी साहिल शर्मा ने गेमिंग गतिविधियों के लिए बैंक खाते की जानकारी मांगी थी।

डिजिटल अरेस्ट कर रिटायर्ड अधिकारी से ठगे 2.21 करोड़, साइबर ठगों के नेटवर्क का खुलासा

उसके अनुसार, खाते में पैसे आने के बाद वह रकम निकालकर अपना कमीशन काटकर साहिल को दे देता था। अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क के मुख्य आरोपी की तलाश कर रही है।

1.25 करोड़ रुपये किए गए फ्रीज

एसीपी क्राइम अमित सक्सेना के मुताबिक, साइबर ठगी से जुड़े अलग-अलग बैंक खातों में करीब 1.25 करोड़ रुपये फ्रीज कराए गए हैं।

पुलिस एनसीआरपी पोर्टल की प्रक्रिया के तहत रकम वापस कराने की कार्रवाई कर रही है। फरार आरोपी साहिल शर्मा की तलाश जारी है।

डिजिटल अरेस्ट से बचने की जरूरत

डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराध का नया तरीका बन चुका है, जिसमें ठग पुलिस, ईडी, सीबीआई या अदालत के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को डराते हैं।

किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा वीडियो कॉल या फोन पर डराकर पैसे ट्रांसफर करने की मांग नहीं की जाती। ऐसे मामलों में तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस से संपर्क करना जरूरी है।

2.21 करोड़ रुपये की यह ठगी एक बार फिर दिखाती है कि साइबर अपराधी डर और भ्रम का फायदा उठाकर बड़े अपराध को अंजाम दे रहे हैं। जागरूकता और सतर्कता ही ऐसे अपराधों से बचने का सबसे मजबूत हथियार है।

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