
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राज्य के उप मुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya ने मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जाहिर कर नया राजनीतिक संदेश दे दिया है। एक कार्यक्रम के दौरान जब उनसे पूछा गया कि वह आखिर कब मुख्यमंत्री बनेंगे तो उन्होंने खुलकर कहा कि अगर पार्टी और विधायक दल चाहेंगे तो वह यह जिम्मेदारी संभालना जरूर चाहेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और चुने हुए विधायक ही करते हैं। केशव मौर्य का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगातार नेतृत्व और भविष्य की रणनीतियों को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। राजनीतिक गलियारों में उनके इस बयान को बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। बीजेपी के भीतर भी इसे लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और विपक्ष भी इस बयान को लेकर तंज कसने लगा है।
अमर उजाला संवाद में दिया जवाब बना चर्चा का केंद्र
यह पूरा घटनाक्रम अमर उजाला संवाद 2026 कार्यक्रम के दौरान सामने आया जहां दर्शकों ने सीधे सवाल पूछे। जब उनसे मुख्यमंत्री बनने को लेकर सवाल हुआ तो केशव मौर्य ने कहा कि राजनीति में कोई भी नेता आगे बढ़ना चाहता है और अगर मौका मिलेगा तो वह भी जिम्मेदारी निभाना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा इसका फैसला पार्टी और विधायक दल करता है। उनका जवाब सुनते ही कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई। बीजेपी समर्थकों ने इसे उनके आत्मविश्वास के रूप में देखा जबकि राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे भविष्य की रणनीतिक तैयारी माना। उत्तर प्रदेश की राजनीति में केशव मौर्य लंबे समय से ओबीसी चेहरे के तौर पर मजबूत पहचान रखते हैं। ऐसे में उनका यह बयान आने वाले चुनावों और संगठनात्मक समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

अतीक अहमद से जुड़ा पुराना किस्सा सुनाकर चौंकाया
कार्यक्रम के दौरान केशव प्रसाद मौर्य ने वर्ष 2004 का एक पुराना और बेहद चर्चित किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उस समय वह हिंदुत्व की राजनीति से जुड़े हुए थे और पहली बार उपचुनाव लड़ रहे थे। उसी दौरान उनकी मुलाकात माफिया Atiq Ahmed के समर्थकों से हुई थी। केशव मौर्य ने दावा किया कि चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पक्षों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बन गई थी। उन्होंने कहा कि एक जगह गाड़ियों की टक्कर के बाद हालात इतने बिगड़ गए थे कि उन्हें लगा अब बड़ी हिंसक घटना हो सकती है। मौर्य ने बताया कि उस समय उनके पास लाइसेंसी राइफल थी और उन्होंने मन ही मन तय कर लिया था कि अगर कोई निर्णायक स्थिति बनी तो वह सीधे अतीक अहमद का सामना करेंगे। उनके इस बयान ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को चौंका दिया और बाद में सोशल मीडिया पर भी यह बयान तेजी से वायरल होने लगा।
बयान के बाद सियासी गलियारों में बढ़ी हलचल
केशव मौर्य के दोनों बयानों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताने वाला बयान बीजेपी के अंदर नेतृत्व को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है तो दूसरी तरफ अतीक अहमद से जुड़ा किस्सा कानून व्यवस्था और पुराने राजनीतिक संघर्षों को लेकर सुर्खियां बटोर रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के बयान अक्सर चुनावी माहौल में कार्यकर्ताओं को संदेश देने के लिए दिए जाते हैं। बीजेपी फिलहाल इन बयानों पर आधिकारिक तौर पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया देने से बच रही है लेकिन विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस पूरे इंटरव्यू को लेकर अपनी-अपनी राय दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में और बड़ा मुद्दा बन सकता है क्योंकि राज्य में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं।