
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री Bhuvan Chandra Khanduri का नैनीताल से रिश्ता केवल राजनीति तक सीमित नहीं था। यह संबंध परिवार, आस्था और भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ था। यही वजह रही कि जब भी खंडूड़ी नैनीताल पहुंचे, वहां के लोगों ने उन्हें एक नेता नहीं बल्कि अपने परिवार के सदस्य की तरह सम्मान दिया। उनके निधन की खबर सामने आते ही नैनीताल में शोक की लहर दौड़ गई। भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ-साथ कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। शहर के बुजुर्ग आज भी उन्हें सादगी और अनुशासन की मिसाल मानते हैं। खंडूड़ी ने अपने राजनीतिक जीवन में जितना महत्व विकास को दिया उतना ही सम्मान उन्होंने मानवीय रिश्तों और सामाजिक मूल्यों को भी दिया। यही कारण है कि उनकी छवि राजनीति से ऊपर उठकर एक ईमानदार जननेता की बन गई थी।
सादगी भरी शादी और नैनीताल से पारिवारिक जुड़ाव
भुवन चंद्र खंडूड़ी का विवाह वर्ष 1963 में नैनीताल के प्रतिष्ठित नैलवाल परिवार में हुआ था। उनकी पत्नी अरुणा नैलवाल मल्लीताल थाने के तत्कालीन थानेदार जगन्नाथ नैलवाल की बेटी थीं। उस दौर में जब बड़े परिवारों में भव्य शादियों का चलन था तब खंडूड़ी ने बेहद सादगी से विवाह कर अपनी सरल सोच का परिचय दिया। नैलवाल परिवार मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल का रहने वाला था लेकिन नौकरी के दौरान परिवार नैनीताल में रहता था। खंडूड़ी की शादी रायल होटल और वेल्ड्राफ होटल में हुई थी जिसकी चर्चा आज भी पुराने लोग करते हैं। परिवार के कई सदस्य प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर रहे। यही पारिवारिक जुड़ाव समय के साथ खंडूड़ी के नैनीताल प्रेम की बड़ी वजह बना। नैनीताल के लोग उन्हें अपने दामाद के रूप में याद करते थे और यही आत्मीय रिश्ता उन्हें बाकी नेताओं से अलग पहचान देता था।

पाषाण देवी मंदिर से जुड़ी आस्था और राजनीति का सफर
खंडूड़ी की धार्मिक आस्था भी नैनीताल से गहराई से जुड़ी हुई थी। शहर की ठंडी सड़क स्थित प्रसिद्ध Pashan Devi Temple में उनकी विशेष श्रद्धा थी। इतिहासकारों के अनुसार जब वरिष्ठ भाजपा नेता Murli Manohar Joshi ने उन्हें भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव दिया तब खंडूड़ी इस फैसले को लेकर गंभीर विचार कर रहे थे। उसी दौरान उनकी माता को मां पाषाण देवी ने सपने में कमल का फूल दिया। परिवार ने इसे शुभ संकेत माना और इसके बाद खंडूड़ी ने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया। उत्तराखंड की राजनीति में यह प्रसंग लंबे समय से श्रद्धा और विश्वास के साथ सुनाया जाता रहा है। राजनीति में आने के बाद भी खंडूड़ी जब भी नैनीताल पहुंचे तो मंदिर में दर्शन जरूर करते थे। उनके लिए यह केवल धार्मिक स्थान नहीं बल्कि जीवन के बड़े फैसलों से जुड़ी आस्था का केंद्र था।
ईमानदार प्रशासन और विकास के लिए हमेशा याद रहेंगे खंडूड़ी
मुख्यमंत्री रहते हुए खंडूड़ी ने अपनी सख्त प्रशासनिक शैली से अलग पहचान बनाई। भ्रष्टाचार के मामलों में उन्होंने कभी समझौता नहीं किया। वर्ष 2007 में मुख्यमंत्री बनने के बाद जब वह नैनीताल पहुंचे तो भाजपा कार्यकर्ताओं ने तत्कालीन कमिश्नर के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत की। खंडूड़ी ने उसी दिन कार्रवाई करते हुए उनका तबादला कर दिया। इस फैसले ने साफ कर दिया कि वह प्रशासनिक मामलों में किसी दबाव में काम नहीं करते थे। उनके कार्यकाल में नैनीताल सहित पूरे उत्तराखंड में कई विकास योजनाओं को गति मिली। सड़क, पर्यटन और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में उनके फैसलों को आज भी याद किया जाता है। राजनीतिक विरोधी भी उनकी व्यक्तिगत ईमानदारी और अनुशासन की सराहना करते थे। नैनीताल के लोगों के लिए खंडूड़ी केवल एक पूर्व मुख्यमंत्री नहीं बल्कि ऐसा जननेता थे जिन्होंने रिश्तों, आस्था और विकास को एक साथ जोड़कर राजनीति की नई मिसाल पेश की।