
गोरखपुर में एक पशु चिकित्सक की मौत ने कथित करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। पुलिस को मिले कथित सुसाइड नोट और परिवार के बयानों से आर्थिक दबाव, बैंक की ईएमआई और लंबे समय से चल रहे तनाव की तस्वीर सामने आई है।
अपार्टमेंट में डॉक्टर की मौत से मचा हड़कंप
गोरखनाथ क्षेत्र के बसंत इनक्लेव में 45 वर्षीय पशु चिकित्सक परमात्मा सिंह की मौत हो गई। बताया गया कि गुरुवार सुबह खाना खाने के बाद वह अपार्टमेंट की छत पर गए थे। कुछ देर बाद नीचे गिरने की सूचना से परिवार में हड़कंप मच गया।
परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
जेब से मिला कथित सुसाइड नोट
पुलिस के अनुसार, डॉक्टर की जेब से एक पन्ना मिला, जिसमें उन्होंने अपनी मौत के लिए गरिमा सिंह को जिम्मेदार बताया। पुलिस अब इस दस्तावेज की जांच के साथ मामले से जुड़े अन्य तथ्यों को भी खंगाल रही है।

परिवार का कहना है कि डॉक्टर कथित आर्थिक धोखाधड़ी के बाद लगातार मानसिक दबाव में थे। उनकी पत्नी डॉ. सुमित्रा सिंह ने बताया कि बैंक से लगातार फोन आ रहे थे और भारी ईएमआई को लेकर वह परेशान रहते थे।
1.40 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप
परमात्मा सिंह ने 5 अगस्त को एम्स थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, गरिमा सिंह ने होम लोन बंद कराने के नाम पर उनसे अलग-अलग बैंकों से पर्सनल लोन लेने को कहा था।
डॉक्टर का आरोप था कि छह बैंकों से लोन स्वीकृत होने के बाद उन्होंने बड़ी रकम गरिमा को दी। शुरुआत में कुछ समय तक ईएमआई चुकाने के बाद कथित तौर पर भुगतान बंद कर दिया गया। डॉक्टर ने अपनी शिकायत में गरिमा के सहयोगी और कुछ बैंक कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे।
आरोपी पिता-बेटी पहले ही गिरफ्तार
पुलिस ने गरिमा सिंह और उसके पिता ध्रुव नारायण सिंह को 3 अगस्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। ध्रुव नारायण सिंह रेलवे में स्टेशन अधीक्षक के पद पर कार्यरत थे और गिरफ्तारी के बाद उन्हें निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, गरिमा पर डॉक्टरों और अधिकारियों समेत कई लोगों से लोन दिलाने या लोन माफ कराने के नाम पर कथित तौर पर करोड़ों रुपये की ठगी करने का आरोप है।
डायरी में बड़े लक्ष्य का कथित जिक्र
जांच के दौरान पुलिस को गरिमा के पास से एक डायरी मिलने की भी बात कही गई है। पुलिस के मुताबिक, डायरी में बड़े पैमाने पर पैसा कमाने के लक्ष्य का उल्लेख था। अब जांच एजेंसी कथित ठगी के पूरे नेटवर्क, बैंक खातों और लेनदेन की कड़ियों को जोड़ रही है।
जांच में सामने आएंगे कई सवालों के जवाब
डॉक्टर की मौत के बाद पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि कथित धोखाधड़ी में कुल कितने लोग शामिल थे और पैसों का वास्तविक प्रवाह कहां तक पहुंचा। साथ ही डॉक्टर पर पड़े आर्थिक और मानसिक दबाव की परिस्थितियों की भी जांच होगी।
यह घटना एक बार फिर बताती है कि आसान लोन, कम ईएमआई या लोन बंद कराने के नाम पर होने वाले किसी भी वित्तीय प्रस्ताव की पूरी जांच जरूरी है। आर्थिक धोखाधड़ी केवल पैसे का नुकसान नहीं करती, बल्कि परिवारों को गहरे संकट में डाल सकती है।
