दिल्ली में इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश, 11 आरोपी गिरफ्तार; 100 करोड़ की ठगी का आरोप

दिल्ली पुलिस की IFSO टीम ने एक कथित बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस के मुताबिक, यह नेटवर्क पीतमपुरा के शिवाजी मार्केट स्थित एक मकान से संचालित किया जा रहा था और अमेरिका समेत दूसरे देशों में बैठे लोगों को टेक सपोर्ट के नाम पर ठगी का शिकार बनाया जाता था।
पुलिस ने मामले में 11 आरोपियों को गिरफ्तार/पकड़ा है। इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए पीड़ितों से करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी की गई।
21 सितंबर को हुई छापेमारी
IFSO की टीम ने 21 सितंबर 2026 को पीतमपुरा के शिवाजी मार्केट स्थित मकान की तीसरी और चौथी मंजिल पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान पुलिस को कथित साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर से जुड़े कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 41 लाख रुपये नकद, 29 लैपटॉप, 25 मोबाइल फोन और 8 राउटर बरामद किए हैं। इसके अलावा एक KIA कार भी जब्त की गई है।

अमेरिकी नागरिकों को बनाते थे निशाना
पुलिस के मुताबिक, आरोपी खुद को टेक सपोर्ट कर्मचारी बताकर अमेरिकी नागरिकों से फोन पर बातचीत करते थे। पीड़ितों को उनके कंप्यूटर में वायरस या मैलवेयर होने का झांसा दिया जाता था।
इसके बाद कथित तौर पर उन्हें समस्या दूर करने के नाम पर साइबर ठगों को कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस देने के लिए कहा जाता था। इसके लिए UltraViewer जैसे रिमोट-एक्सेस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किए जाने की बात पुलिस ने कही है।
गिफ्ट कार्ड खरीदवाकर करते थे ठगी
पुलिस की जांच के अनुसार, रिमोट एक्सेस हासिल करने के बाद आरोपी पीड़ितों को फर्जी बैंक या टेक्निकल सपोर्ट अधिकारी बनकर निर्देश देते थे।
पीड़ितों से iTunes, Sephora, Target और Google Pay जैसे प्लेटफॉर्म के गिफ्ट कार्ड खरीदने के लिए कहा जाता था। गिफ्ट कार्ड के कोड मिलने के बाद उनकी जानकारी कथित तौर पर WhatsApp ग्रुप के माध्यम से नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचाई जाती थी।
कुछ मामलों में पीड़ितों से Bitcoin जैसी क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसफर करवाने का भी आरोप है।
फर्जी FBI दस्तावेजों से डराने का आरोप
जांच में पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपी कथित तौर पर पीड़ितों को डराने के लिए FBI और अमेरिकी संघीय एजेंसियों से जुड़े फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करते थे।
कॉल के दौरान आरोपियों ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए Williams, Rayan, Sofi, Genny और Alex जैसे फर्जी नामों का इस्तेमाल किया।
इस तरीके से पीड़ितों के बीच भरोसा पैदा करने और उन्हें दबाव में लाने की कोशिश की जाती थी, ऐसा पुलिस का कहना है।
41 लाख कैश समेत कई उपकरण बरामद
छापेमारी में बरामद 29 लैपटॉप, 25 मोबाइल फोन और 8 राउटर को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस इन उपकरणों से कथित कॉलिंग नेटवर्क, डिजिटल लेनदेन और विदेशों में मौजूद पीड़ितों से संपर्क से जुड़ी जानकारी जुटा रही है।
बरामद 41 लाख रुपये नकद के स्रोत और इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है।
विदेश में बैठे नेटवर्क के सदस्यों की तलाश
मामले में FIR नंबर 224/2026 दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस के अनुसार, भारत और विदेशों में मौजूद सिंडिकेट के कुछ अन्य प्रमुख सदस्यों की पहचान कर ली गई है।
उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है। जांच में कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल उपकरणों, बैंकिंग लेनदेन और कथित क्रिप्टो ट्रांजैक्शन से जुड़ी जानकारी भी खंगाली जा रही है।
दिल्ली में लगातार सामने आ रहे साइबर फ्रॉड के मामले
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब दिल्ली में बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क लगातार जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं। हाल ही में दिल्ली पुलिस ने 83.23 करोड़ रुपये के कथित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भी खुलासा किया था और छह लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
पीतमपुरा मामले में पुलिस की जांच अब गिरफ्तार आरोपियों से आगे बढ़कर नेटवर्क के दूसरे सदस्यों, विदेशों में मौजूद संपर्कों और कथित वित्तीय लेनदेन तक पहुंचाने पर केंद्रित है।
पीतमपुरा में हुई कार्रवाई ने टेक सपोर्ट के नाम पर चलाए जा रहे कथित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क की कार्यप्रणाली सामने लाई है। अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने, रिमोट एक्सेस लेने, गिफ्ट कार्ड और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए रकम हासिल करने के आरोपों की पुलिस जांच कर रही है। अब जांच का अगला फोकस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और धन के प्रवाह का पता लगाने पर है।
