
बिहार में शराबबंदी को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के गुजरात मॉडल वाले बयान ने सहयोगी दलों के बीच चर्चा बढ़ा दी है। जेडीयू ने साफ किया कि फिलहाल राज्य में शराबबंदी लागू है, बदलाव पर फैसला गठबंधन मिलकर करेगा।
मांझी की मांग पर जेडीयू का रुख
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बिहार की शराबबंदी व्यवस्था को लेकर गुजरात मॉडल की तर्ज पर बदलाव की मांग की थी। उनके बयान के बाद विपक्ष को सरकार पर सवाल उठाने का मौका मिला।
गुरुवार को जेडीयू कार्यालय में जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान मंत्री अशोक चौधरी से इस मुद्दे पर सवाल पूछा गया। उन्होंने कहा कि मांझी की अपनी राय है और गठबंधन में शामिल दल उनकी भावना पर विचार-विमर्श करेंगे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल बिहार में शराबबंदी लागू है।
तेजस्वी के ‘खजाना खाली’ वाले बयान पर पलटवार
अशोक चौधरी ने आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के उस दावे को भी खारिज किया, जिसमें उन्होंने बिहार सरकार का खजाना खाली होने की बात कही थी। चौधरी ने इसे भ्रम फैलाने वाला बयान बताया।
उन्होंने सवाल किया कि अगर सरकार की आर्थिक स्थिति खराब है तो पेंशन, वेतन और दूसरे सरकारी काम कैसे चल रहे हैं। उनका कहना था कि राज्य में विकास और प्रशासनिक गतिविधियां प्रभावित नहीं हुई हैं।

पांच महीने से वेतन नहीं मिलने के दावे पर तंज
तेजस्वी यादव के कथित तौर पर पांच महीने से वेतन नहीं मिलने के दावे पर भी अशोक चौधरी ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें अपना वेतन मिल रहा है और किसी अन्य विधायक ने ऐसी शिकायत नहीं की है।
चौधरी ने तंज कसते हुए कहा कि शायद तेजस्वी यादव का कोई ‘स्पेशल अकाउंट’ होगा। तेजस्वी के लोकभवन मार्च को लेकर भी उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की।
2 हजार से ज्यादा नियुक्ति पत्र बांटे गए
शराबबंदी और सियासी आरोप-प्रत्यारोप के बीच अशोक चौधरी ने रोजगार के मुद्दे पर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने बताया कि गुरुवार को BPSC की ओर से करीब 2,000 से ज्यादा नियुक्ति पत्र बांटे गए।
उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों में नियुक्तियां हुई हैं और सरकार ने 2025 से 2030 तक एक करोड़ नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य रखा है।
कानून-व्यवस्था पर भी दिया भरोसा
बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों पर चौधरी ने कहा कि राज्य में स्थिति पूरी तरह दुरुस्त है। हाजीपुर में हुई घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और जांच के आधार पर आगे कार्रवाई होगी।
शराबबंदी पर आगे क्या होगा?
मांझी के बयान ने बिहार में शराबबंदी की नीति को फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ सरकार मौजूदा कानून के जारी रहने की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ गठबंधन के भीतर ही इसके स्वरूप पर अलग-अलग राय सामने आ रही है।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या बिहार की शराबबंदी व्यवस्था में भविष्य में कोई बदलाव होगा या सरकार मौजूदा नीति को ही जारी रखेगी? फिलहाल अशोक चौधरी के बयान से इतना साफ है कि तत्काल कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है।
