रायबरेली से अखिलेश की PDA यात्रा: बस पर ‘जो पीड़ित, वही PDA’, आंबेडकर की तस्वीर से सामाजिक न्याय का संदेश

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 24 सितंबर 2026 को रायबरेली से अपनी PDA रथ यात्रा की शुरुआत की। यात्रा के लिए तैयार की गई विशेष बस पर लिखे संदेशों ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है। बस के सामने बड़े अक्षरों में ‘जो पीड़ित, वही PDA है’ लिखा गया है, जबकि किनारे पर पीड़ित, दलित और अल्पसंख्यक का उल्लेख किया गया है।
बस के बाहरी हिस्से में नीली पट्टी बनाई गई है और डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित कई समाज सुधारकों की तस्वीरें लगाई गई हैं। इसके साथ ‘सामाजिक न्याय का परचम लहराएगा, PDA ही परिवर्तन लाएगा’ जैसे संदेश भी दिखाई दे रहे हैं।
‘पीड़ित’ को PDA से जोड़ने का संदेश
समाजवादी पार्टी की पारंपरिक PDA परिभाषा में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग शामिल हैं। लेकिन इस यात्रा की बस पर ‘जो पीड़ित, वही PDA’ संदेश के जरिए पीड़ित होने की पहचान को भी अभियान की भाषा में शामिल किया गया है।
पार्टी के मुताबिक, यात्रा के दौरान उन परिवारों से संपर्क किया जाएगा जो पुलिस या प्रशासन की कार्रवाई से खुद को पीड़ित मानते हैं। इस तरह सपा सामाजिक पहचान के साथ शिकायत और न्याय के मुद्दे को भी अपने अभियान से जोड़ रही है।

आंबेडकर की तस्वीर और नीली पट्टी
बस की डिजाइन में डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर और नीले रंग का प्रमुख इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा समाजवादी आंदोलन से जुड़े नेताओं और समाज सुधारकों को भी जगह दी गई है। इससे यात्रा का संदेश केवल संगठनात्मक कार्यक्रम के बजाय सामाजिक न्याय के मुद्दों के इर्द-गिर्द प्रस्तुत किया गया है।
सपा लंबे समय से PDA को अपनी सामाजिक-राजनीतिक रणनीति का प्रमुख हिस्सा बताती रही है। इस यात्रा में दलित और पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधित्व को सामने रखने की कोशिश भी दिखाई दे रही है।
रायबरेली से शुरुआत क्यों?
अखिलेश यादव के लिए रायबरेली का चयन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। रायबरेली लोकसभा सीट वर्तमान में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पास है और जिले को लंबे समय से कांग्रेस की राजनीतिक पहचान से जोड़ा जाता रहा है। 24 सितंबर के कार्यक्रम में अखिलेश यादव हरचंदपुर के सपा विधायक राहुल लोधी के आवास पर भी जाएंगे।
यात्रा के शुरुआती हिस्से में बछरावां भी शामिल है। बछरावां से सपा विधायक श्याम सुंदर भारती दलित समुदाय से आते हैं, जबकि राहुल लोधी को पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधि के तौर पर देखा जाता है। इस तरह एक ही दौरे में सपा ने अपने PDA सामाजिक समीकरण से जुड़े दो प्रतिनिधित्वों को सामने रखा है।
छात्र विवाद के बाद रायबरेली पर फोकस
रायबरेली में हाल में फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज में समाजवादी छात्र सभा और ABVP से जुड़े छात्रों के बीच विवाद हुआ था। इस घटनाक्रम के बाद सपा ने इसे लेकर पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। पुलिस ने विधायक राहुल लोधी से मारपीट के आरोपों से इनकार किया है।
अखिलेश यादव ने इसी घटनाक्रम के बाद राहुल लोधी के घर जाने और कार्यकर्ताओं से मुलाकात करने का कार्यक्रम घोषित किया था। 24 सितंबर के दौरे में कार्यकर्ताओं से संवाद के साथ PDA रथ का सार्वजनिक इस्तेमाल भी हुआ।
2027 की तैयारी में संगठन पर जोर
सपा की यह यात्रा केवल एक दिन के रायबरेली कार्यक्रम तक सीमित रहने के बजाय पार्टी के सामाजिक संपर्क अभियान का हिस्सा बताई जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी इस माध्यम से कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद और विभिन्न सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने पर जोर दे रही है।
रायबरेली का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की छह सीटों में से चार पर सपा और दो पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। यानी कांग्रेस की ऐतिहासिक राजनीतिक पहचान वाले जिले में सपा का विधानसभा स्तर पर मजबूत प्रदर्शन भी रहा है।
गठबंधन की राजनीति के बीच यात्रा
सपा और कांग्रेस के बीच 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सीटों और गठबंधन की संभावनाओं पर राजनीतिक चर्चा जारी है। ऐसे समय में राहुल गांधी के लोकसभा क्षेत्र रायबरेली से PDA यात्रा की शुरुआत को विभिन्न राजनीतिक विश्लेषणों में दोनों दलों के संबंधों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हालांकि, यात्रा का आधिकारिक संदेश सपा संगठन और PDA सामाजिक गठजोड़ पर केंद्रित है।
रायबरेली से शुरू हुई अखिलेश यादव की PDA यात्रा में इस बार सिर्फ रथ और राजनीतिक सभा ही चर्चा में नहीं हैं। ‘जो पीड़ित, वही PDA’, नीली पट्टी, आंबेडकर की तस्वीर और सामाजिक न्याय के संदेश के जरिए सपा ने अपने अभियान की थीम को दृश्य रूप में सामने रखा है। अब इस यात्रा का अगला चरण किन जिलों और किन सामाजिक समूहों तक पहुंचता है, यह अभियान की आगे की दिशा तय करेगा।