
देहरादून में हुई एक प्रेस वार्ता के बाद उत्तराखंड की राजनीति अचानक गरमा गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने गदरपुर से भाजपा विधायक अरविंद पांडेय के एक पत्र का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री और राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। इस बयान के बाद बाजपुर सहित कई इलाकों में राजनीतिक हलचल तेज हो गई। गोदियाल के आरोपों को लेकर भाजपा खेमे में असहजता दिखाई दी, वहीं विपक्ष ने इसे सरकार की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल करार दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
नामधारी का पलटवार, पांडेय पर गंभीर आरोप
इस विवाद के बीच उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष सुखदेव सिंह नामधारी ने बाजपुर स्थित अपने आवास पर प्रेस वार्ता कर तीखा पलटवार किया। उन्होंने विधायक अरविंद पांडेय पर कांग्रेस से सांठगांठ के आरोप लगाए और कहा कि पांडेय भाजपा में रहते हुए भी पार्टी की छवि खराब करने में लगे हैं। नामधारी ने दावा किया कि पांडेय कांग्रेस में जाने की तैयारी कर रहे हैं और यह पूरा घटनाक्रम उसी दिशा में इशारा करता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पांडेय लगातार अपनी ही सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, उससे यह साफ होता जा रहा है कि उनकी निष्ठा कहीं और है।

मुकदमों और पक्षपात के आरोपों से बढ़ा विवाद
नामधारी ने अपने आरोपों को और गंभीर बनाते हुए कहा कि अरविंद पांडेय के खिलाफ 30 से 35 मुकदमे दर्ज हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विधायक ने अपने रिश्तेदारों को सरकारी विभागों और चीनी मिलों में नौकरी दिलाने का काम किया है। नामधारी ने कहा कि पांडेय ने जैसे ठेका ले रखा है कि रोज भाजपा और सरकार को बदनाम करना है। उनके अनुसार, इससे पार्टी को बड़ा नुकसान हो रहा है और कार्यकर्ताओं में भी असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने भाजपा प्रदेश नेतृत्व से मांग की कि ऐसे विधायक के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित किया जाए।
गोदियाल को मानहानि नोटिस की चेतावनी
वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए नामधारी ने कहा कि उनके खिलाफ बिना किसी तथ्य के टिप्पणी की गई है। उन्होंने इसे पूरी तरह गलत और भ्रामक बताते हुए कहा कि वे जल्द ही मानहानि का नोटिस भेजेंगे। नामधारी ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक बयानबाजी में मर्यादा बनाए रखना जरूरी है और किसी की छवि खराब करने का प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस पूरे विवाद ने उत्तराखंड की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।