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AAP में बड़ी टूट के संकेत शिअद नेता मजीठिया ने किया चौंकाने वाला दावा

आम आदमी पार्टी (AAP) में एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, क्योंकि हाल ही में पार्टी के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के बाद अब और टूट के संकेत मिलने लगे हैं। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने सोशल मीडिया पर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी पंजाब में लगातार कमजोर हो रही है और आने वाले दिनों में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

दो और सांसद छोड़ सकते हैं AAP, मजीठिया का दावा

बिक्रम सिंह मजीठिया ने अपने पोस्ट में दावा किया है कि आम आदमी पार्टी के दो और सांसद जल्द ही पार्टी छोड़ सकते हैं। उन्होंने अपने सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि यह प्रक्रिया पहले से चल रही है और जल्द ही इसका असर दिखाई देगा। मजीठिया ने अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को टैग करते हुए कहा कि पार्टी में “विदाई का सिलसिला” लगातार जारी है और आने वाले समय में यह और लंबा हो सकता है। हालांकि आम आदमी पार्टी की ओर से इस दावे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

AAP में बड़ी टूट के संकेत शिअद नेता मजीठिया ने किया चौंकाने वाला दावा

दल-बदल कानून और सांसदों की स्थिति पर बढ़ी चर्चा

इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच दल-बदल विरोधी कानून को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। मौजूदा स्थिति में आम आदमी पार्टी के पास लोकसभा में तीन सांसद हैं, जो सभी पंजाब से आते हैं। कानून के अनुसार यदि कोई सांसद पार्टी छोड़ता है और वह संख्या किसी निर्धारित सीमा को पार करती है, तो उन्हें अयोग्य घोषित होने से बचने का अवसर मिल सकता है। ऐसे में यदि मजीठिया का दावा सही साबित होता है, तो दो सांसदों के पार्टी छोड़ने पर भी उनकी सदस्यता पर तुरंत असर नहीं पड़ेगा और वे दूसरी पार्टी में शामिल हो सकते हैं।

AAP में पहले भी टूट, राघव चड्ढा पर भी उठे सवाल

गौरतलब है कि इससे पहले भी आम आदमी पार्टी में असंतोष की खबरें सामने आ चुकी हैं, जब राघव चड्ढा के कथित तौर पर पार्टी से अलग होने की चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया था। उस दौरान पार्टी पर गंभीर आरोप भी लगे थे, जिसमें संगठनात्मक मतभेद और नेतृत्व को लेकर सवाल उठाए गए थे। पार्टी ने इन घटनाओं को “विश्वासघात” बताया था, जबकि विपक्ष ने इसे AAP की आंतरिक कमजोरी के रूप में पेश किया था। अब एक बार फिर नए दावों ने पार्टी की राजनीतिक स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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