नंद गोपाल नंदी से UPEDA का प्रभार वापस, अखिलेश यादव का तंज- ‘अभी हाफ हुए हैं, टिकट नहीं मिला तो साफ हो जाएंगे’

उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय नई बहस छिड़ गई जब योगी सरकार ने औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ के पास से उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEDA) का प्रभार वापस ले लिया। सरकार के इस फैसले के बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा और नंदी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है।
जानकारी के अनुसार, 27 मई 2026 को जारी एक प्रशासनिक आदेश के तहत UPEDA से जुड़े सभी कार्य अब अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास से संबंधित उस अनुभाग को सौंप दिए गए हैं, जिसकी निगरानी सीधे मुख्यमंत्री Yogi Adityanath करते हैं। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य परियोजनाओं के बेहतर समन्वय और निर्णय प्रक्रिया में तेजी लाना है।
इस फैसले के बाद सपा प्रमुख Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा कि “अभी हाफ हुए हैं, विधानसभा में टिकट नहीं मिलेगा तो साफ हो जाएंगे।” उन्होंने आरोप लगाया कि एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में भ्रष्टाचार हुआ है और अब राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए बदलाव किए जा रहे हैं।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में यह भी दावा किया कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों में बड़ी संख्या में अपने उम्मीदवार बदल सकती है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में जिन क्षेत्रों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा, वहां पार्टी अपने मौजूदा विधायकों को टिकट देने से बच सकती है। साथ ही उन्होंने भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी निशाना साधा।
वहीं भाजपा और सरकार की ओर से इस फैसले को पूरी तरह प्रशासनिक बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, UPEDA के अंतर्गत गंगा एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। इन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण, निवेश, टेंडर और निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं।
सरकारी आदेश में कहा गया है कि अवस्थापना विकास अनुभाग पहले से ही बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की योजना और समन्वय का कार्य देखता है। ऐसे में UPEDA से जुड़े कार्यों को भी उसी विभाग के अंतर्गत लाने से निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तेज हो सकेगी।
फिलहाल इस प्रशासनिक बदलाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर विपक्ष इसे सरकार के भीतर की खींचतान से जोड़कर देख रहा है, वहीं सरकार इसे विकास परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए उठाया गया कदम बता रही है।
