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कौन हैं महेश केवट? BJP के तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार ने बढ़ाई कांग्रेस की चिंता, क्रॉस वोटिंग का बढ़ा डर

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीसरी राज्यसभा सीट के लिए महेश केवट को उम्मीदवार बनाकर राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। उनके नामांकन के बाद कांग्रेस खेमे में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि अब चुनावी मुकाबला पहले से अधिक रोचक और चुनौतीपूर्ण हो गया है।

महेश केवट वर्तमान में मध्य प्रदेश मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं और प्रदेश में केवट तथा मछुआरा समाज के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाकर सामाजिक समीकरण साधने के साथ-साथ संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान देने का संदेश भी दिया है।

महेश केवट का राजनीतिक और सामाजिक सफर काफी लंबा रहा है। वे वर्ष 1984 से Rashtriya Swayamsevak Sangh से जुड़े हुए हैं। उन्होंने ओरछा शाखा में मुख्य शिक्षक के रूप में भी कार्य किया। छात्र जीवन में वे Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad के ब्लॉक संयोजक रहे और बाद में Vishwa Hindu Parishad की निवाड़ी इकाई में सचिव की जिम्मेदारी भी संभाली।

वर्ष 1995 से वे भाजपा की सक्रिय राजनीति में हैं। इस दौरान उन्होंने जिला कार्यसमिति सदस्य, जिला मंत्री, जिला उपाध्यक्ष और प्रदेश कार्यसमिति सदस्य जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वर्ष 2000 में वे स्थानीय निकाय चुनाव जीतकर पार्षद बने और बाद में नगर परिषद ओरछा के उपाध्यक्ष भी रहे। इसके अलावा कई विधानसभा और लोकसभा उपचुनावों में संगठन की ओर से अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।

राज्यसभा चुनाव में भाजपा पहले ही दो उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी थी, लेकिन अंतिम समय में महेश केवट को तीसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारकर पार्टी ने राजनीतिक संदेश दिया है। माना जा रहा है कि भाजपा को अपनी रणनीति और संख्या बल पर भरोसा है।

दूसरी ओर कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग की आशंका सता रही है। इसी वजह से पार्टी अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति पर काम कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अपने विधायकों को कर्नाटक भेजने की तैयारी में है ताकि किसी भी तरह की टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग की संभावना को रोका जा सके।

महेश केवट की उम्मीदवारी ने राज्यसभा चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। अब सभी की नजरें मतदान और संभावित राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हैं।

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