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हरिद्वार में ‘वेज बिरयानी’ पर छिड़ी बहस, नाम बदलने की मांग से बढ़ी चर्चा

धर्मनगरी हरिद्वार में इस बार विवाद किसी राजनीतिक या प्रशासनिक मुद्दे को लेकर नहीं, बल्कि एक लोकप्रिय खाद्य पदार्थ के नाम को लेकर खड़ा हो गया है। ‘वेज बिरयानी’ को ‘वेज पुलाव’ लिखने की मांग ने शहर में नई बहस को जन्म दे दिया है, जिसमें धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक तर्क आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।
संतों ने शुरू किया अभियान

हरिद्वार के देवपुरा चौक और तुलसी चौक क्षेत्र में श्री अखंड परशुराम अखाड़े के कार्यकर्ताओं ने कई ठेलों और दुकानों पर ‘वेज पुलाव’ के पोस्टर लगाए। अभियान का नेतृत्व अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने किया।

संतों का कहना है कि ‘बिरयानी’ शब्द पारंपरिक रूप से मांसाहारी व्यंजन से जुड़ा माना जाता है, इसलिए शाकाहारी भोजन के लिए इसका उपयोग उचित नहीं है।

सांस्कृतिक पहचान का हवाला

अभियान से जुड़े संतों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का तर्क है कि हरिद्वार केवल एक शहर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। उनका मानना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए खाद्य पदार्थों के नामों में भी स्थानीय परंपराओं और संवेदनशीलताओं का सम्मान होना चाहिए।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी दुकानदार के व्यवसाय को प्रभावित करना नहीं है।

दुकानदारों से संवाद की कोशिश

अभियान के दौरान कार्यकर्ताओं ने दुकानदारों से बातचीत कर उन्हें स्वेच्छा से अपने बोर्ड और मेन्यू में बदलाव करने का आग्रह किया। कई स्थानों पर इस विषय पर सकारात्मक चर्चा भी हुई, जबकि कुछ लोगों ने इसे व्यक्तिगत पसंद और बाजार की मांग से जुड़ा मुद्दा बताया।

मुस्लिम संघर्ष समिति ने जताई आपत्ति

दूसरी ओर, मुस्लिम संघर्ष समिति ने इस पूरे विवाद को अनावश्यक बताया है। समिति के अध्यक्ष सोहेल अख्तर ने कहा कि वेज बिरयानी और वेज पुलाव जैसे नामों को लेकर विवाद खड़ा करना समाज के लिए कोई सकारात्मक संदेश नहीं देता।

उन्होंने हरिद्वार की साझा सांस्कृतिक विरासत और आपसी सौहार्द को बनाए रखने पर जोर दिया।

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