
छात्र आंदोलन के समर्थन में जंतर-मंतर पर अनशन के बाद अपने गृह क्षेत्र लेह-लद्दाख पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने नया वीडियो संदेश जारी किया। इसमें उन्होंने वंदे भारत एक्सप्रेस की तारीफ को लेकर उठे विवाद पर प्रतिक्रिया दी और केंद्र सरकार से आंदोलन के दौरान किए गए लिखित आश्वासनों को पूरा करने की मांग दोहराई।
लेह पहुंचकर जारी किया वीडियो संदेश
लेह-लद्दाख स्थित अपने गांव पहुंचने के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली से लौटते समय उन्होंने वंदे भारत एक्सप्रेस से यात्रा की और यात्रा का अनुभव सकारात्मक रहा। उनके अनुसार, किसी अच्छी व्यवस्था या सुविधा की सराहना करना राजनीति का विषय नहीं होना चाहिए।
वंदे भारत की तारीफ पर क्या बोले?
वांगचुक ने कहा कि कुछ लोगों ने उनकी वंदे भारत एक्सप्रेस की प्रशंसा को राजनीतिक नजरिए से देखा, जबकि उनका उद्देश्य केवल अपने अनुभव को साझा करना था। उन्होंने लोगों से अपील की कि अच्छी पहल की सराहना और नीतिगत मुद्दों पर सवाल उठाना—दोनों साथ-साथ हो सकते हैं।

सरकार से दोहराई पुरानी मांगें
वीडियो संदेश में उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि छात्र आंदोलन समाप्त कराने के दौरान जो लिखित आश्वासन दिए गए थे, उन्हें पूरी तरह लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई या एफआईआर नहीं होनी चाहिए और सरकार को युवाओं के बीच विश्वास का माहौल बनाना चाहिए।
Back In My Village…
But haven’t forgotten the causes.
With hopes that government will fulfil the remaining promises too…No copyrights share freely #cjp #sonamwangchuknews pic.twitter.com/785UObJNqA
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 31, 2026
पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की मांग
सोनम वांगचुक ने कथित नीट पेपर लीक से प्रभावित और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग भी दोहराई। उनका कहना था कि ऐसे परिवारों को न्याय और आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए।
संवाद और भरोसे पर दिया जोर
वांगचुक ने अपने संदेश में कहा कि देश के युवाओं के साथ संवाद, विश्वास और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने सभी पक्षों से मिलकर समाधान निकालने और सकारात्मक माहौल बनाने की अपील की।
लेह पहुंचने के बाद सोनम वांगचुक ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि उनकी वंदे भारत एक्सप्रेस की सराहना व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित थी और इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दों, सरकार के आश्वासनों और प्रभावित परिवारों के लिए अपनी मांगों को दोहराते हुए संवाद और विश्वास की आवश्यकता पर बल दिया।