
महंगाई भत्ता (DA) को लेकर पंजाब सरकार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए पहले दिए गए आदेश को बरकरार रखा है। इसके तहत सरकार को करीब छह लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को बकाया DA का भुगतान करना होगा। साथ ही देरी की स्थिति में 6 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा।
हाईकोर्ट ने खारिज की सरकार की अपील
सोमवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें पहले के आदेश को चुनौती दी गई थी। इससे पहले अदालत ने सरकार को 30 जून तक बकाया DA का भुगतान करने का निर्देश दिया था। अब अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि कर्मचारियों और पेंशनरों को उनका वैधानिक बकाया दिया जाना आवश्यक है।
करीब 6 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को राहत
अदालत के फैसले से राज्य के लगभग छह लाख कर्मचारियों और पेंशनरों को सीधा लाभ मिलेगा। रिपोर्टों के अनुसार, बकाया DA और संबंधित देनदारियों के भुगतान के लिए सरकार पर लगभग 15,000 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ सकता है। हालांकि अंतिम राशि सरकारी गणना और पात्रता के आधार पर तय होगी।

सभी पात्र पेंशनरों को मिलेगा लाभ
हाईकोर्ट ने अपने 14 मार्च के आदेश में स्पष्ट किया था कि DA का लाभ केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सभी पात्र पेंशनरों को मिलेगा। अदालत ने सरकार को आदेश के पालन की रिपोर्ट निर्धारित समय के भीतर दाखिल करने को भी कहा था। साथ ही यह भी स्पष्ट किया था कि आदेश का पालन न होने पर प्रभावित पेंशनर दोबारा अदालत का रुख कर सकते हैं।
क्या थी कर्मचारियों की मांग?
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से 1 जनवरी 2016 से 30 जून 2021 तक संशोधित पेंशन का बकाया, 1 जुलाई 2015 से केंद्र सरकार के पैटर्न के अनुसार संशोधित DA तथा भुगतान में देरी होने पर ब्याज देने की मांग की थी। अदालत ने इन मांगों पर सुनवाई के बाद सरकार को बकाया DA का भुगतान करने और 6 प्रतिशत ब्याज देने का आदेश दिया था।
सरकार के सामने बढ़ी वित्तीय चुनौती
हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद पंजाब सरकार के सामने कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया भुगतान की बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी आ गई है। अब सरकार को अदालत के आदेश के अनुरूप तय समय सीमा में भुगतान करना होगा। यह फैसला न केवल लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि सरकारी सेवा से जुड़े वित्तीय अधिकारों पर भी महत्वपूर्ण न्यायिक टिप्पणी माना जा रहा है।
