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नेताजी की अस्थियां भारत लाने की मांग, बेटी अनीता बोस फाफ पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के निधन और उनके अवशेषों को लेकर दशकों पुराना सवाल एक बार फिर अदालत के सामने है। उनकी बेटी अनीता बोस फाफ ने टोक्यो के रेनकोजी मंदिर में रखे बताए जाने वाले अवशेष भारत लाने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है।

बेटी ने खुद उठाई पिता के अवशेष भारत लाने की मांग

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी अनीता बोस फाफ ने अपने पिता के बताए जाने वाले पार्थिव अवशेष जापान से भारत लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है। याचिका में भारत सरकार से अवशेषों को वापस लाने को लेकर फैसला लेने की मांग की गई है।

केंद्र, विदेश और गृह मंत्रालय से मांगा जवाब

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील एएम सिंघवी ने अदालत को बताया कि इस बार नेताजी की बेटी स्वयं याचिकाकर्ता के तौर पर सामने आई हैं। पीठ ने पहले केंद्र सरकार का पक्ष जानने का फैसला किया। इसके बाद नोटिस जारी किया गया। अब केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय का जवाब इस मामले की अगली दिशा तय करने में अहम होगा।

नेताजी की अस्थियां भारत लाने की मांग, बेटी अनीता बोस फाफ पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट

मार्च में भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था मामला

यह मुद्दा इससे पहले मार्च 2026 में भी सुप्रीम कोर्ट के सामने आया था। तब नेताजी के परिवार से जुड़े आशीष रे की ओर से दायर जनहित याचिका पर अदालत ने सुनवाई से इनकार करते हुए कहा था कि अनीता बोस फाफ स्वयं अपने नाम से याचिका दायर करें। अब उन्होंने खुद अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

रेनकोजी मंदिर में रखे हैं बताए जाने वाले अवशेष

टोक्यो के रेनकोजी मंदिर में नेताजी के बताए जाने वाले अवशेष लंबे समय से रखे हुए हैं। अनीता बोस फाफ का कहना है कि उनके पिता को उनकी मातृभूमि में अंतिम सम्मान मिलना चाहिए। इस मुद्दे को लेकर वह वर्षों से भारत सरकार के सामने अपनी इच्छा व्यक्त करती रही हैं। सरकारी दस्तावेजों में भी रेनकोजी मंदिर में रखे अवशेषों को लेकर लंबे समय से चर्चा और जांच का रिकॉर्ड मौजूद है।

18 अगस्त 1945 से जुड़ा है रहस्य

नेताजी की मृत्यु को लेकर प्रचलित आधिकारिक जांच निष्कर्ष के अनुसार 18 अगस्त 1945 को ताइवान में एक विमान हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में उनकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनकी अस्थियां जापान ले जाई गईं और रेनकोजी मंदिर में रखी गईं। हालांकि, नेताजी की मौत और अवशेषों की पहचान को लेकर दशकों से सार्वजनिक बहस और अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं।

अब केंद्र के जवाब पर टिकी नजर

अनीता बोस फाफ की याचिका ने नेताजी के अवशेषों की वापसी के पुराने सवाल को फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का जवाब महत्वपूर्ण होगा। मामला सिर्फ एक परिवार की भावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि नेताजी की विरासत, उनके अंतिम सम्मान और इतिहास के एक लंबे अध्याय को लेकर भी इससे जुड़ा है।

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