
मंत्री विजय शाह की कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी का मामला एक बार फिर मध्य प्रदेश की राजनीति के केंद्र में है। अभियोजन की मंजूरी अब तक लंबित रहने के बीच कांग्रेस ने राज्यपाल से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग तेज कर दी है।
राज्यपाल से मिले कांग्रेस नेता
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की अनुमति का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।
कांग्रेस का कहना है कि मामले में सरकार ने मंत्री के खिलाफ केस चलाने की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है, जबकि राज्यपाल की ओर से भी अब तक अभियोजन की मंजूरी नहीं मिली है।
पुनर्विचार का मिला आश्वासन
मुलाकात के दौरान राज्यपाल ने कांग्रेस नेताओं को आश्वासन दिया कि वह विजय शाह के खिलाफ अभियोजन के फैसले पर पुनर्विचार करेंगे। इस आश्वासन के बाद कांग्रेस को मुद्दे पर आगे कार्रवाई की उम्मीद जगी है।
हालांकि, अंतिम निर्णय क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
कैबिनेट के फैसले से बढ़ा विवाद
मंत्री पर केस चलाने की अनुमति को लेकर पिछली कैबिनेट बैठक में सरकार ने फैसला किया था कि विजय शाह के खिलाफ अभियोजन नहीं चलाया जाएगा। इसके बाद संबंधित फाइल राज्यपाल के पास भेजी गई।

राज्यपाल की ओर से मंजूरी नहीं मिलने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका। इसी बीच कांग्रेस लगातार सरकार पर सवाल उठाती रही है।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला
विजय शाह प्रकरण की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में भी हुई है। अदालत में सरकार की ओर से बताया गया कि मामले से संबंधित फैसला लंबित है और फाइल राज्यपाल के पास भेजी गई है।
अब राज्यपाल के पुनर्विचार के संकेत ने इस कानूनी और राजनीतिक मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।
कांग्रेस ने तेज की कार्रवाई की मांग
कांग्रेस का कहना है कि विवादित टिप्पणी के मामले में निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया होनी चाहिए और मंत्री के खिलाफ अभियोजन की अनुमति दी जानी चाहिए। पार्टी इस मुद्दे को लगातार राजनीतिक मंचों पर उठा रही है।
दूसरी ओर, सरकार पहले ही कैबिनेट के फैसले के जरिए अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है।
अब फैसले पर टिकी नजर
राज्यपाल के पुनर्विचार के आश्वासन के बाद अब निगाहें अगले कदम पर हैं। क्या अभियोजन की मंजूरी मिलेगी या सरकार का मौजूदा फैसला बरकरार रहेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
फिलहाल विजय शाह प्रकरण ने मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर कानूनी प्रक्रिया, संवैधानिक भूमिका और राजनीतिक जवाबदेही पर बहस तेज कर दी है।