व्यापार

कम EMI का फायदा या नुकसान जानिए लोन का पूरा आर्थिक गणित

आज के समय में स्मार्टफोन, लैपटॉप, एसी या घर का फर्नीचर खरीदने के लिए EMI का विकल्प बेहद लोकप्रिय हो गया है। लोग अक्सर यह सोचकर लंबी अवधि की कम EMI चुन लेते हैं कि हर महीने कम भुगतान से बजट पर दबाव नहीं पड़ेगा। लेकिन असल में यही फैसला लंबे समय में आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। कम EMI भले ही तुरंत राहत दे, लेकिन यह कुल मिलाकर ज्यादा खर्च का कारण बनती है।

EMI का गणित: कैसे छोटी किस्त बन जाती है बड़ा बोझ

लोन की EMI का पूरा खेल ब्याज और समय पर आधारित होता है। अगर आप 10 लाख रुपये का लोन 10% ब्याज पर लेते हैं, तो 5 साल के लिए EMI लगभग 21,247 रुपये होगी और कुल भुगतान करीब 12.75 लाख रुपये तक पहुंचेगा, जिसमें ब्याज 2.75 लाख रुपये होगा। लेकिन अगर वही लोन 10 साल के लिए लिया जाए, तो EMI घटकर लगभग 13,215 रुपये हो जाती है, लेकिन कुल भुगतान 15.86 लाख रुपये तक पहुंच जाता है और ब्याज 5.86 लाख रुपये हो जाता है। यानी कम EMI का मतलब है ज्यादा ब्याज और ज्यादा कुल खर्च।

कम EMI का फायदा या नुकसान जानिए लोन का पूरा आर्थिक गणित

लंबी अवधि में क्यों बढ़ जाता है ब्याज का बोझ

लोन पर ब्याज हमेशा बची हुई मूल राशि (principal) पर लगता है। जब लोन की अवधि लंबी होती है, तो मूलधन धीरे-धीरे कम होता है और ब्याज अधिक समय तक जुड़ता रहता है। यही कारण है कि लंबी अवधि का लोन देखने में आसान लगता है, लेकिन असल में यह कुल लागत को काफी बढ़ा देता है। सरल शब्दों में कहें तो कम EMI का मतलब है कम मासिक दबाव, लेकिन लंबे समय में अधिक आर्थिक नुकसान।

होम लोन का उदाहरण: कैसे लाखों का फर्क पड़ता है

होम लोन में यह अंतर और भी बड़ा हो जाता है। अगर 50 लाख रुपये का लोन 8.5% ब्याज पर लिया जाए, तो 15 साल की अवधि में EMI लगभग 49,000 रुपये होती है और कुल भुगतान 88 लाख रुपये तक पहुंचता है, जिसमें 38 लाख रुपये ब्याज होता है। वहीं 25 साल की अवधि में EMI घटकर लगभग 40,000 रुपये हो जाती है, लेकिन कुल भुगतान 1.20 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है और ब्याज 70 लाख रुपये हो जाता है। यानी लंबी अवधि में लगभग दोगुना ब्याज चुकाना पड़ सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button