KGBV शिक्षकों को बड़ी राहत हाईकोर्ट का आदेश 4 महीने में नियमितीकरण पर फैसला

Uttar Pradesh news(Speed bharat news): उत्तर प्रदेश के KGBV शिक्षकों के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत वाली खबर सामने आई है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में कई साल से संविदा पर पढ़ा रहे शिक्षकों को अब नियमित होने की उम्मीद जगी है। KGBV शिक्षकों के नियमितीकरण को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने यूपी सरकार को चार महीने के अंदर फैसला लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि जब तक नियमितीकरण को लेकर फैसला नहीं हो जाता तब तक सभी शिक्षकों को हर महीने 17 हजार रुपये मानदेय दिया जाए।
दरअसल प्रदेश के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में बड़ी संख्या में शिक्षक लंबे समय से संविदा पर काम कर रहे हैं। इन शिक्षकों की शिकायत थी कि उनसे नियमित शिक्षकों की तरह काम लिया जाता है लेकिन वेतन और दूसरी सुविधाओं के मामले में उनके साथ बराबरी नहीं की जाती। कई साल तक नौकरी करने के बाद भी उनकी सेवा को नियमित करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
इसी मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने राज्य सरकार की व्यवस्था पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि लंबे समय तक संविदा पर शिक्षकों से नियमित पदों जैसा काम लेना और उन्हें बराबर वेतन व सुविधाएं नहीं देना सही नहीं है। कोर्ट ने इस व्यवस्था को संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत प्रतिबंधित जबरन श्रम यानी बंधुआ मजदूरी के समान माना है।
हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि चार महीने के भीतर KGBV में शिक्षकों के पद स्वीकृत और सृजित करने के साथ उनकी सेवा शर्तों को नियमित शिक्षकों के बराबर करने पर फैसला लिया जाए।
इस आदेश की सबसे बड़ी बात यह है कि इसका फायदा सिर्फ अदालत में याचिका लगाने वाले शिक्षकों को ही नहीं मिलेगा बल्कि प्रदेश के सभी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में काम कर रहे शिक्षकों पर यह आदेश लागू होगा।
अब प्रदेश के हजारों शिक्षकों की नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी है। अगर सरकार कोर्ट के निर्देश के मुताबिक कदम उठाती है तो लंबे समय से संविदा पर काम कर रहे शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है।
