
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर देशभर में हो रहे प्रदर्शनों के बीच जनसुराज संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा आंदोलन के पीछे केवल चुनावी प्रक्रिया को लेकर असहमति नहीं, बल्कि बेरोजगारी, पेपर लीक और शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण जैसी समस्याएं भी हैं। उनके मुताबिक, जब तक इन मुद्दों का समाधान नहीं होगा, तब तक लोगों का आक्रोश किसी न किसी रूप में सामने आता रहेगा।
चुनावी प्रक्रिया से असहमति रखने वाला बड़ा वर्ग आंदोलन में
प्रशांत किशोर ने कहा कि समाज का एक बड़ा वर्ग ऐसा है, जो मौजूदा चुनावी प्रक्रिया से सहमत नहीं है और अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए आंदोलन कर रहा है। उन्होंने देश में जारी प्रदर्शनों को कई सामाजिक और आर्थिक समस्याओं से जोड़कर देखा।
उनके अनुसार, छात्र शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक की घटनाओं से परेशान हैं, जबकि युवा बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे हैं। प्रशांत किशोर का कहना है कि इन मुद्दों के कारण लोगों में असंतोष बढ़ रहा है और आंदोलन केवल किसी एक राजनीतिक दल या नेता तक सीमित नहीं है।
राहुल गांधी चाहें तो भी नहीं रुकेगा आंदोलन: प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर ने दावा किया कि लोगों की समस्याओं का समाधान किए बिना आंदोलन को रोकना संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी भी चाहें, तब भी यह आंदोलन नहीं रुकेगा, क्योंकि इसके पीछे लोगों की वास्तविक परेशानियां और नाराजगी है।
उन्होंने कहा कि लोग अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरने और विरोध का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन चुप बैठने को तैयार नहीं हैं। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि किसी आंदोलन को केवल राजनीतिक नेतृत्व या प्रबंधन के जरिए खत्म नहीं किया जा सकता, जब तक उससे जुड़े मुद्दों पर ध्यान न दिया जाए।

शिक्षा के व्यवसायीकरण और पेपर लीक पर उठाए सवाल
प्रशांत किशोर ने शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते व्यवसायीकरण को बड़ी समस्या बताया। उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्थानों का बढ़ता प्रभाव और शिक्षा से जुड़े दूसरे बदलाव पेपर लीक जैसी समस्याओं से जुड़े हुए हैं।
उनके मुताबिक, प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों से छात्रों का भरोसा प्रभावित होता है। मेहनत और तैयारी के बाद भी जब परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं, तो युवाओं में निराशा बढ़ती है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया।
आईटी कंपनियों में नौकरियों की कमी का भी किया जिक्र
प्रशांत किशोर ने रोजगार के मुद्दे पर कहा कि पहले बड़ी संख्या में पढ़े-लिखे युवाओं को टीसीएस और इन्फोसिस जैसी कंपनियों में नौकरी मिलने की उम्मीद रहती थी, लेकिन अब कई युवाओं को रोजगार हासिल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने विशेष रूप से व्हाइट-कॉलर नौकरियों में अवसर कम होने की बात कही और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, तकनीकी बदलावों के साथ रोजगार के अवसरों में आ रहे परिवर्तन भी युवाओं की चिंता बढ़ा रहे हैं।
हालांकि, रोजगार में कमी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में भर्ती की स्थिति, आर्थिक परिस्थितियों और AI के प्रभाव का आकलन करने के लिए विस्तृत आंकड़ों की जरूरत होती है।
आर्थिक दबाव से बढ़ रहा सामाजिक असंतोष
प्रशांत किशोर ने शिक्षा, बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था की चुनौतियों को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ बताया। उन्होंने कहा कि गरीब और कमजोर वर्ग पहले से आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे थे, जबकि युवाओं के सामने अब शिक्षा और रोजगार से संबंधित नई चुनौतियां भी हैं।
उनके अनुसार, जब शिक्षा का खर्च बढ़ता है, परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं और पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार नहीं मिलता, तो लोगों का असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है। उन्होंने देश में दिखाई दे रहे विरोध प्रदर्शनों को इसी व्यापक सामाजिक और आर्थिक नाराजगी से जोड़कर देखा।
वोट चोरी के विरोध के बीच बयान के मायने
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर विपक्षी दलों के प्रदर्शन के बीच प्रशांत किशोर का बयान आंदोलन के पीछे मौजूद सामाजिक और आर्थिक कारणों पर ध्यान खींचता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से बेरोजगारी, पेपर लीक, शिक्षा के व्यवसायीकरण और आर्थिक दबाव को युवाओं की नाराजगी से जोड़ा।
हालांकि, उनके बयान में व्यक्त विचार उनका राजनीतिक आकलन हैं। आंदोलन का वास्तविक स्वरूप और उसमें शामिल लोगों की अलग-अलग मांगें संबंधित संगठनों के बयानों तथा उपलब्ध तथ्यों के आधार पर समझी जानी चाहिए। फिलहाल, प्रशांत किशोर ने कहा है कि बुनियादी समस्याओं का समाधान किए बिना देश में असंतोष को खत्म करना मुश्किल होगा।
