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कांवड़ यात्रा से पहले बढ़ा भ्रम: कांवड़ की ऊंचाई पर राज्यों के अलग-अलग नियम

श्रावण मास कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले कांवड़ की अधिकतम ऊंचाई को लेकर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा की अलग-अलग गाइडलाइन ने श्रद्धालुओं और प्रशासन दोनों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। हरिद्वार में इस बार भी पैदल कांवड़ की अधिकतम ऊंचाई 6 फीट और झांकी वाली कांवड़ की ऊंचाई 10 फीट निर्धारित की गई है। वहीं, कुछ अन्य राज्यों में इससे अधिक ऊंचाई की अनुमति दिए जाने की जानकारी सामने आने से भ्रम की स्थिति बन गई है।

सुरक्षा कारणों से तय की गई ऊंचाई

हरिद्वार पुलिस के अनुसार ऊंची कांवड़ बिजली की हाईटेंशन लाइनों, फ्लाईओवर, पुलों और अन्य संरचनाओं के लिए खतरा बन सकती हैं। इसके अलावा हर वर्ष अत्यधिक ऊंची कांवड़ों की वजह से यातायात जाम और दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है। इसी कारण उत्तराखंड प्रशासन ने पहले की तरह इस वर्ष भी निर्धारित ऊंचाई सीमा लागू रखने का फैसला किया है।

कांवड़ यात्रा से पहले बढ़ा भ्रम: कांवड़ की ऊंचाई पर राज्यों के अलग-अलग नियम

दूसरे राज्यों के नियम बढ़ा रहे हैं उलझन

दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों, खासकर मेरठ क्षेत्र में 10 से 12 फीट तक की कांवड़ को लेकर अलग दिशा-निर्देश सामने आए हैं। इसी तरह दिल्ली और हरियाणा के कुछ इलाकों में भी अलग-अलग मानकों की जानकारी मिल रही है। ऐसे में यदि कोई श्रद्धालु दूसरे राज्य के नियमों के अनुसार अधिक ऊंचाई वाली कांवड़ लेकर हरिद्वार पहुंचता है, तो उत्तराखंड सीमा में उसे परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इससे पुलिस और कांवड़ियों के बीच विवाद की आशंका भी बढ़ सकती है।

17 जुलाई की बैठक पर टिकी निगाहें

श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों का कहना है कि सभी संबंधित राज्यों को आपसी समन्वय के साथ एक समान नियम लागू करने चाहिए, ताकि यात्रा सुरक्षित और सुचारू रूप से संपन्न हो सके। हरिद्वार के एसएसपी नवनीत सिंह ने बताया कि 17 जुलाई को हरिद्वार में अंतरराज्यीय बैठक आयोजित होगी, जिसमें कांवड़ की ऊंचाई सहित अन्य महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं पर चर्चा की जाएगी। प्रशासन का प्रयास रहेगा कि सभी राज्यों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर एकरूप व्यवस्था लागू की जाए।

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