राजनीतिराज्य

छात्रों की कथित अभद्र टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, सामुदायिक सेवा की मांग

सोशल मीडिया पर कथित रूप से अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले कुछ छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की मांग अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। एक सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर अनुरोध किया है कि ऐसे मामलों में केवल दंडात्मक कार्रवाई के बजाय संबंधित छात्रों से सामुदायिक सेवा भी कराई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है और मामले को बुधवार के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

याचिका में क्या मांग की गई?

याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया है कि सोशल मीडिया पर कथित तौर पर अपमानजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले छात्रों को सामुदायिक सेवा का आदेश दिया जाए। याचिका में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का भी उल्लेख करते हुए आयोजकों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।

जंतर-मंतर प्रदर्शन का दिया गया हवाला

याचिका में 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन का संदर्भ दिया गया है। उस प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया था, जबकि कुछ प्रदर्शनकारियों पर पथराव के आरोप भी लगे। इस दौरान पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबरें सामने आई थीं।

छात्रों की कथित अभद्र टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, सामुदायिक सेवा की मांग

वायरल वीडियो और विवाद

प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए, जिनमें कुछ युवाओं द्वारा कथित रूप से अभद्र भाषा का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया। इनमें से एक नाबालिग लड़की का वीडियो भी चर्चा में रहा। बाद में उसने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा कि उसने दूसरों के उकसावे में आकर ऐसा किया और अपने शब्दों पर खेद जताया।

मामले ने पकड़ा कानूनी और राजनीतिक तूल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद विभिन्न राजनीतिक नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। वहीं, सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, जिम्मेदारी और सार्वजनिक संवाद की मर्यादा को लेकर बहस तेज हो गई। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

अदालत की टिप्पणी पर रहेगी नजर

बुधवार को होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट याचिका की स्वीकार्यता और उसमें उठाए गए सुझावों पर विचार करेगा। अदालत क्या रुख अपनाती है, यह आगे की कानूनी प्रक्रिया तय करेगा। फिलहाल यह स्पष्ट है कि यह मामला केवल सोशल मीडिया व्यवहार तक सीमित नहीं, बल्कि सार्वजनिक संवाद, नागरिक जिम्मेदारी और संवैधानिक मूल्यों से भी जुड़ा हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button