
सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान के लगातार आरोपों के बीच भारत ने कड़ा जवाब दिया है। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने स्पष्ट कहा कि संधि को कमजोर करने का कारण भारत नहीं, बल्कि पाकिस्तान की दशकों पुरानी आतंकवाद समर्थक नीतियां, युद्ध और समझौते का दुरुपयोग है।
पाकिस्तान के आरोपों पर भारत का जवाब
सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की ओर से उठाए जा रहे सवालों का भारत ने तीखा जवाब दिया है। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने एक लेख में कहा कि भारत ने संधि को बिना वजह स्थगित नहीं किया, बल्कि पाकिस्तान ने वर्षों तक आतंकवाद, युद्ध और संधि के दुरुपयोग के जरिए इसकी मूल भावना को कमजोर किया।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत को “वॉटर एग्रेसर” बताने की कोशिश करता है, जबकि उसकी जल समस्याओं की सबसे बड़ी वजह उसकी अपनी नीतियां और जल प्रबंधन की विफलताएं हैं।
पहलगाम हमले के बाद लिया गया फैसला
विनय क्वात्रा ने बताया कि अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी, के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया। उनके अनुसार इस हमले में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों की भूमिका रही, जिसके बाद भारत ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया।

भारत ने निभाई संधि, पाकिस्तान ने बढ़ाया तनाव
राजदूत ने याद दिलाया कि 1960 की सिंधु जल संधि के तहत भारत ने दशकों तक समझौते का पालन किया। इसके बावजूद पाकिस्तान ने 1965, 1971 और 1999 में युद्ध किए तथा संसद हमला, 26/11 मुंबई हमला, पठानकोट, उरी, पुलवामा और पहलगाम जैसे आतंकी हमलों का समर्थन करने के आरोप झेले।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के कारण भारत के 40 हजार से अधिक नागरिकों की जान जा चुकी है।
जल परियोजनाओं में भी लगाया रोड़ा
क्वात्रा ने आरोप लगाया कि भारत की जलविद्युत परियोजनाओं को पाकिस्तान ने लगातार कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझाकर बाधित किया। साथ ही कुछ परियोजनाओं पर आतंकी हमलों ने भी भारत की योजनाओं को प्रभावित किया।
उनके अनुसार सिंधु जल संधि की प्रस्तावना “सद्भावना और मित्रता” पर आधारित थी, लेकिन पाकिस्तान के व्यवहार ने उसी भावना को खत्म कर दिया।
पाकिस्तान की जल समस्या पर भी उठाए सवाल
लेख में पाकिस्तान के जल प्रबंधन पर भी सवाल उठाए गए। विनय क्वात्रा ने कहा कि पाकिस्तान को मिलने वाले पानी का केवल लगभग 40 प्रतिशत ही खेतों तक पहुंच पाता है, जबकि बड़ी मात्रा में पानी रास्ते में ही बर्बाद हो जाता है या समुद्र में चला जाता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए भारत नहीं, बल्कि पाकिस्तान की अपनी व्यवस्था जिम्मेदार है।
आतंक खत्म किए बिना नहीं बढ़ेगा सहयोग
लेख के अंत में क्वात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का उल्लेख किया कि “आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते, आतंक और व्यापार साथ-साथ नहीं चल सकते, और पानी और खून भी साथ-साथ नहीं बह सकते।”
उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान वास्तव में भारत के साथ बेहतर संबंध चाहता है तो उसे सबसे पहले अपनी धरती पर सक्रिय आतंकी ढांचे को समाप्त करना होगा।
सिंधु जल संधि को लेकर भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे को अलग नहीं देखा जा सकता। भारत का कहना है कि सहयोग का रास्ता तभी खुलेगा, जब पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई करेगा।