राज्य

बिहार के सरकारी अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल, मरीज के पैर पर बांधा कार्टन

बिहार के बेगूसराय से सामने आए एक वीडियो ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है। सड़क हादसे में घायल मरीज के टूटे पैर पर प्लास्टर की जगह कार्टन बंधा दिखाई दिया। वीडियो वायरल होने के बाद जांच शुरू हो गई है, जबकि अस्पताल इसे प्राथमिक उपचार का हिस्सा बता रहा है।

वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

बेगूसराय जिले के मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में सड़क दुर्घटना में घायल एक व्यक्ति के टूटे हुए पैर पर प्लास्टर की जगह कार्टन बंधा दिखाई देता है। तस्वीरें सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल मच गई और मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए गए।

15 जुलाई की है घटना

अधिकारियों के अनुसार, यह घटना 15 जुलाई की है। नवकोठी थाना क्षेत्र के महेश्वरा गांव निवासी कृष्ण कुमार सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें पहले मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेगूसराय सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां उनका आगे का इलाज सफलतापूर्वक किया गया।

बिहार के सरकारी अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल, मरीज के पैर पर बांधा कार्टन

अस्पताल ने क्या दी सफाई?

बेगूसराय के सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि इसे सीधे मेडिकल लापरवाही नहीं कहा जा सकता। उनके मुताबिक, प्राथमिक उपचार के दौरान घायल पैर को स्थिर रखना सबसे जरूरी होता है। यदि मानक स्प्लिंट उपलब्ध न हो, तो कार्डबोर्ड, लकड़ी या अन्य मजबूत सामग्री का अस्थायी स्प्लिंट के रूप में इस्तेमाल चिकित्सा की स्वीकृत प्राथमिक सहायता (First Aid) का हिस्सा हो सकता है।

जांच के आदेश, संसाधनों की कमी का दावा

जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। जिला मजिस्ट्रेट ने मंझौल के उपमंडल पदाधिकारी (SDO) को पूरे प्रकरण की जांच सौंपी है। वहीं अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अस्पताल में ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों और फ्रैक्चर स्प्लिंट जैसी आवश्यक चिकित्सा सामग्री की कमी है। इसके बावजूद उपलब्ध संसाधनों से मरीजों को सुरक्षित उपचार देने का प्रयास किया जाता है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

हालांकि अस्पताल ने इसे आपातकालीन प्राथमिक उपचार बताया है, लेकिन वायरल वीडियो ने सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन हुआ था या कहीं लापरवाही हुई।

बेगूसराय की यह घटना सिर्फ एक वायरल वीडियो नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों और संसाधनों की कमी की ओर भी इशारा करती है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिससे तय होगा कि यह उचित प्राथमिक उपचार था या व्यवस्था की गंभीर चूक।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button