
हरियाणा की राजनीति में वोटों की गिनती से लेकर जातीय पहचान तक, बयानबाजी ने नया मोड़ ले लिया है। इनेलो नेता अभय चौटाला ने कांग्रेस और बीजेपी पर तीखे आरोप लगाते हुए चुनावी राजनीति, वोटों के बंटवारे और जातिगत टिप्पणियों को लेकर दोनों दलों को निशाने पर लिया है।
हुड्डा पर अभय चौटाला का बड़ा हमला
इनेलो नेता अभय चौटाला ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि हुड्डा कभी इनेलो को ‘वोट काटू’ कहते थे, लेकिन अब वही खुद वोट बेचकर आने का आरोप झेल रहे हैं। चौटाला ने दावा किया कि नौ वोटों में से पांच बीजेपी के पक्ष में डलवाए गए और चार वोट कैंसिल करवाए गए। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पर भी साधा निशाना
अभय चौटाला ने बीजेपी की प्रदेश अध्यक्ष अर्चना गुप्ता के बयानों पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन किसी जाति विशेष को लेकर टिप्पणी करते समय भाषा की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। चौटाला ने किसान समुदाय को देश का अन्नदाता बताते हुए कहा कि इसी समाज ने देश को खेलों में भी बड़ी उपलब्धियां दिलाई हैं।
‘हमें छेड़ो मत’, जातीय पहचान पर बोले चौटाला
जातिगत पहचान को लेकर भी चौटाला ने खुलकर अपनी बात रखी। जाट समाज की बेटी से जुड़े बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई जाट परिवार में पैदा हुआ है तो उसे अपनी पहचान बताने में संकोच नहीं होना चाहिए। उन्होंने खुद को जाट परिवार में जन्म लेने पर गर्व होने की बात कही।

बीजेपी पर पुराने नेताओं को लेकर तंज
बीजेपी पर हमला करते हुए अभय चौटाला ने कई पुराने नेताओं का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने पहले ओम प्रकाश धनखड़ और कैप्टन अभिमन्यु जैसे नेताओं को किनारे किया और अब आगे किस नेता का राजनीतिक भविष्य प्रभावित होगा, यह कहना मुश्किल है। उनके इस बयान को हरियाणा बीजेपी के भीतर नेतृत्व और गुटबाजी पर तंज के तौर पर देखा जा रहा है।
हरियाणा में फिर गरमाया जातीय सियासत का मुद्दा
अभय चौटाला के बयानों के बाद हरियाणा की राजनीति में जातीय समीकरण एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। राज्य की राजनीति में जातिगत पहचान और सामाजिक समूहों का प्रभाव लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में नेताओं के तीखे बयान चुनावी माहौल को और गर्म कर सकते हैं।
बयानबाजी से आगे क्या?
फिलहाल चौटाला के आरोपों ने कांग्रेस और बीजेपी दोनों को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है। लेकिन असली सवाल यह है कि जनता इन आरोपों और पलटवारों को किस नजर से देखती है। चुनावी राजनीति में बयान कुछ समय के लिए सुर्खियां जरूर बटोरते हैं, मगर अंततः फैसला मतदाता के हाथ में होता है।
