
भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित ‘राजा हिरदेशाह लोधी शौर्य यात्रा’ के दौरान उमा भारती ने आरक्षण नीति का जोरदार समर्थन करते हुए इसे सामाजिक न्याय हासिल करने का अहम माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में अब भी असमानताएं गहरी जड़ें जमाए हुए हैं और इन्हें खत्म करने के लिए मजबूत कदम जरूरी हैं। उन्होंने इसे केवल नीति नहीं बल्कि समाज को बराबरी की दिशा में ले जाने वाला साधन बताया। इस दौरान उन्होंने सामाजिक बदलाव के लिए जनजागरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया और लोगों से सक्रिय भागीदारी की अपील की।
तीसरे स्वतंत्रता संग्राम का आह्वान और सामाजिक बदलाव की जरूरत
अपने संबोधन में उमा भारती ने कहा कि देश ने पहले स्वतंत्रता संग्राम में आजादी हासिल की और अब समय आ गया है कि सामाजिक समानता के लिए तीसरा स्वतंत्रता संग्राम लड़ा जाए। उन्होंने कहा कि केवल कानून बनाकर समाज में बराबरी नहीं लाई जा सकती बल्कि सोच और व्यवहार में बदलाव भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने जाति आधारित भेदभाव और आर्थिक असमानताओं को आज भी बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि इनसे निपटने के लिए समाज के हर वर्ग को मिलकर काम करना होगा।

शिक्षा और सामाजिक समानता पर तीखी टिप्पणी
शिक्षा व्यवस्था में मौजूद असमानताओं पर टिप्पणी करते हुए उमा भारती ने कहा कि जब तक देश के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के परिवार सरकारी स्कूलों में आम बच्चों के साथ पढ़ाई नहीं करेंगे तब तक वास्तविक समानता संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रभावशाली वर्ग अगर आम नागरिकों की तरह सार्वजनिक संस्थानों पर निर्भर होगा तभी समाज में बराबरी की भावना मजबूत होगी। उन्होंने भारतीय परंपराओं का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे यहां प्रकृति और जीवों के प्रति सम्मान की परंपरा रही है लेकिन सामाजिक व्यवहार में अभी भी भेदभाव देखने को मिलता है जिसे खत्म करना जरूरी है।
राजनीति, समुदाय और राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर बोलीं उमा भारती
अपने राजनीतिक अनुभव साझा करते हुए उमा भारती ने कहा कि उन्होंने कई बार सिद्धांतों के लिए पद छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास के नए दौर की बात करते हुए भरोसा जताया कि देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने लोधी समुदाय की राजनीतिक भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह समुदाय सरकार बनाने में निर्णायक साबित हो सकता है। वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि भारत भविष्य में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को वापस हासिल करेगा। कार्यक्रम में अन्य नेताओं ने भी समुदाय के इतिहास को संरक्षित करने और राजा हिरदेशाह की जीवनी को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग उठाई।