
3 जून को दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में एक चार मंजिला इमारत अचानक मौत का जाल बन गई। इस इमारत के बेसमेंट में चल रहे अवैध रेस्तरां के किचन में शॉर्ट सर्किट से आग लगी और उसी दौरान LPG पाइपलाइन में लीकेज ने आग को और भयानक बना दिया। कुछ ही मिनटों में आग नहीं बल्कि घना जहरीला धुआं पूरे ढांचे में फैल गया। यही धुआं आगे चलकर सबसे बड़ी मौतों की वजह बना।
सीढ़ियां बनी मौत का रास्ता और धुआं बना सबसे बड़ा दुश्मन
जांच में सामने आया कि इमारत की डिजाइन ही इस हादसे को और भयावह बना गई। बेसमेंट से ऊपर जाने वाली सीढ़ियां एक सेंट्रल डक्ट की तरह काम कर रही थीं। धुआं तेजी से ऊपर की मंजिलों तक पहुंच गया और लोग अपने कमरों में फंस गए। तीसरी मंजिल पर ठहरे मेहमानों को भागने का कोई मौका नहीं मिला। सबसे बड़ी चूक यह थी कि इमारत में न फायर अलार्म था, न स्मोक डिटेक्टर और न ही कोई इमरजेंसी एग्जिट।
21 मौतें और एक परिवार का पूरी तरह उजड़ जाना
इस दर्दनाक हादसे में कुल 22 लोगों की जान गई जिनमें गुरुग्राम के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के परिवार के आठ सदस्य शामिल थे। इसके अलावा बेसमेंट किचन में काम कर रहे कर्मचारी और होटल में ठहरे अन्य मेहमान भी इस आग की चपेट में आ गए। कई शव इस तरह जल चुके थे कि पहचान मुश्किल हो गई और पुलिस को DNA टेस्ट का सहारा लेना पड़ा। मृतकों में भारतीय और विदेशी दोनों शामिल थे जिससे मामला और गंभीर हो गया।

अवैध किचन और सुरक्षा नियमों की खुली धज्जियां
पुलिस जांच में यह साफ हुआ कि बेसमेंट में चल रहा रेस्तरां पूरी तरह अवैध था। नियमों के मुताबिक बेसमेंट का इस्तेमाल केवल पार्किंग या स्टोरेज के लिए किया जा सकता है लेकिन यहां कमर्शियल किचन चल रहा था। इमारत में न तो फायर NOC सही तरीके से लागू था और न ही सुरक्षा उपकरण काम कर रहे थे। यह भी सामने आया कि नक्शे में दर्ज उपयोग और असल स्थिति में बड़ा अंतर था।
लापरवाही और गिरफ्तारी के बीच उठते बड़े सवाल
हादसे के बाद इमारत के मालिक और होटल को-ओनर को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन पर गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। लेकिन जांच अब केवल मालिक तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि नगर निगम और फायर विभाग की नजर इस अवैध सेटअप पर क्यों नहीं पड़ी। क्या वर्षों से चल रहे इस किचन की कभी सही जांच नहीं हुई या रिपोर्ट दबा दी गई। अब सरकार ने सभी बेसमेंट रेस्तरां की जांच के आदेश दिए हैं और पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं।
