5 साल का इंतजार खत्म! जिला अस्पताल में 100 बेड के मातृ एवं शिशु अस्पताल का निर्माण जल्द होगा शुरू

करीब पांच वर्षों से लंबित मातृ एवं शिशु अस्पताल परियोजना अब धरातल पर उतरने की ओर बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग से मंजूरी मिलने के बाद जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। नए अस्पताल के बनने से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को बेहतर उपचार के साथ निशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा।
पांच साल बाद मिली परियोजना को रफ्तार
जिला नागरिक अस्पताल परिसर में प्रस्तावित 100 बेड के मातृ एवं शिशु अस्पताल के निर्माण का रास्ता अब साफ होता दिख रहा है। स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय से स्वीकृति मिलने के बाद आगामी दिनों में टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग (PWD) की देखरेख में लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से कराया जाएगा।
गर्भवती महिलाओं को मिलेगा बड़ा लाभ
नए अस्पताल के शुरू होने के बाद हर साल करीब 12 हजार गर्भवती महिलाओं की निशुल्क डिलीवरी कराने का लक्ष्य है। वर्तमान में जिला नागरिक अस्पताल में प्रसूति और नवजात शिशुओं के लिए केवल 40 बेड उपलब्ध हैं, जिसके कारण कई बार मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर करना पड़ता है।
आधुनिक सुविधाओं से होगा लैस अस्पताल
प्रस्तावित अस्पताल में गर्भवती महिलाओं और बच्चों के उपचार के लिए आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती भी की जाएगी, जिससे जटिल मामलों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही संभव हो सकेगा।

बजट में बदलाव से परियोजना हुई प्रभावित
इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई थी। शुरुआती योजना के अनुसार अस्पताल को सात मंजिला और लगभग 125 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाना था। बाद में बजट में कमी के चलते परियोजना में संशोधन किया गया और इसे सीमित बजट के साथ दो मंजिला भवन के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया। इसी कारण योजना कई वर्षों तक कागजी प्रक्रिया में अटकी रही।
पुराने भवन की जगह बनेगा नया अस्पताल
अस्पताल का निर्माण जिला नागरिक अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने स्थित पुराने सिविल सर्जन कार्यालय की इमारत वाली जगह पर किया जाएगा। इस पुराने भवन को पहले ही हटाया जा चुका है, जिससे निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी लगभग पूरी मानी जा रही है।
जिले के हजारों परिवारों को मिलेगा फायदा
जिले में हर वर्ष लगभग 29 हजार बच्चों का जन्म होता है। इनमें से करीब 9 हजार प्रसव सरकारी अस्पतालों में और लगभग 20 हजार प्रसव निजी अस्पतालों में होते हैं। निजी अस्पतालों में सामान्य प्रसव के लिए 15 से 16 हजार रुपये और सिजेरियन डिलीवरी के लिए 30 हजार रुपये या उससे अधिक खर्च करना पड़ता है। ऐसे में नए सरकारी अस्पताल के शुरू होने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।