राजनीतिराज्य

राम मंदिर दान विवाद पर शंकराचार्य का बड़ा बयान, बोले- मंदिरों में ही सरकारी दखल क्यों?

अयोध्या राम मंदिर में कथित दान और चढ़ावा गबन मामले को लेकर जांच और गिरफ्तारियों के बीच अब धार्मिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए मंदिरों में सरकारी हस्तक्षेप पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारों के मामलों में सरकार का सीधा दखल नहीं होता, तो केवल मंदिरों के प्रशासन और आय पर ही सरकारी नियंत्रण क्यों रखा जाता है।

‘मंदिर की आय जनता के हित में खर्च हो’

शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि बड़े मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा करोड़ों रुपये का दान और चढ़ावा दिया जाता है। उनका मानना है कि इस धन का उपयोग उसी जिले और क्षेत्र के विकास के लिए किया जाना चाहिए, जहां मंदिर स्थित है। उन्होंने सुझाव दिया कि मंदिर की आय से गौशालाएं, पाठशालाएं, धर्मशालाएं, औषधालय और अन्य जनहित के कार्य किए जाएं, ताकि समाज को सीधा लाभ मिल सके।

राम मंदिर दान विवाद पर शंकराचार्य का बड़ा बयान, बोले- मंदिरों में ही सरकारी दखल क्यों?

उन्होंने कहा कि मंदिरों की बची हुई राशि भी स्थानीय विकास और धार्मिक-सामाजिक कार्यों में ही लगाई जानी चाहिए, न कि किसी अन्य उद्देश्य के लिए।

‘सरकार को मंदिर का धन खर्च करने का अधिकार नहीं’

शंकराचार्य ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, इसलिए सरकार को मंदिरों की आय पर नियंत्रण या उसके उपयोग का अधिकार नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, धार्मिक संस्थानों की संपत्ति और दान का प्रबंधन संबंधित धार्मिक संस्थाओं के हाथ में ही रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिरों का अधिग्रहण या उनके धन का सरकारी उपयोग उचित नहीं माना जा सकता।

राम मंदिर दान मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई?

राम मंदिर दान विवाद में एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जांच एजेंसियों का दावा है कि अब तक आरोपियों के कब्जे से लगभग 79.85 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं। मामले में नकदी के साथ-साथ सोने-चांदी के आभूषणों की कथित हेराफेरी की भी जांच जारी है।

जांच जारी, बढ़ी राजनीतिक और धार्मिक बहस

इस मामले के सामने आने के बाद मंदिरों की वित्तीय पारदर्शिता, दान प्रबंधन और सरकारी निगरानी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर जांच एजेंसियां पूरे मामले की तह तक पहुंचने का दावा कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर विभिन्न धार्मिक और राजनीतिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी लगातार सामने आ रही हैं। अब सभी की नजर एसआईटी की विस्तृत जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button