PGI पेपर लीक केस में 14 साल बाद फैसला, 31 वर्षीय महिला दोषी करार

चंडीगढ़ की विशेष CBI अदालत ने PGI के MD/MS प्रवेश परीक्षा पेपर लीक मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने आंध्र प्रदेश निवासी 31 वर्षीय वाई. हरिप्रिया को दोषी करार दिया है।
यह मामला 10 नवंबर 2012 को PGI चंडीगढ़ में आयोजित MD/MS प्रवेश परीक्षा से जुड़ा है। इस मामले में हरिप्रिया समेत कुल 32 आरोपितों के खिलाफ करीब 14 साल से कानूनी कार्रवाई चल रही है। इनमें से तीन आरोपितों को अदालत भगोड़ा घोषित कर चुकी है।
हरिप्रिया ने खुद कबूल किया जुर्म
मामले की सुनवाई के दौरान हरिप्रिया ने खुद अदालत में अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसने अपनी पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए दोष स्वीकार किया।
अदालत ने परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग धाराओं में पहले से काटी गई करीब चार महीने की न्यायिक हिरासत को ही उसकी सजा मान लिया। इसके साथ ही कोर्ट ने उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
पेपर लीक की बड़ी साजिश का आरोप
CBI के मुताबिक, पुष्पगिरी गुरिवी रेड्डी, डॉ. कोटा गंगाधर रेड्डी, डॉ. दारा कोटेश और अन्य आरोपितों ने कथित तौर पर परीक्षा में नकल कराने और प्रश्नपत्र लीक करने की साजिश रची थी।

जांच एजेंसी के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से परीक्षा केंद्रों में बैठे अभ्यर्थियों तक उत्तर पहुंचाने की योजना बनाई गई थी।
11 परीक्षा केंद्रों पर होनी थी परीक्षा
10 नवंबर 2012 को MD/MS प्रवेश परीक्षा सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक चंडीगढ़ के 11 केंद्रों पर आयोजित होनी थी।
CBI की जांच के अनुसार, कथित साजिश के तहत आरोपितों और डमी अभ्यर्थियों के ठहरने की व्यवस्था सेक्टर-35 स्थित होटल KC Residency और सेक्टर-22 के कुछ अन्य होटलों में की गई थी।
यहीं से परीक्षा से जुड़ी कथित गतिविधियों को संचालित करने की तैयारी की गई थी।
14 डमी लड़कियों से भरवाए गए थे फॉर्म
CBI जांच में सामने आया कि MD/MS परीक्षा के लिए 14 डमी लड़कियों से दो-दो आवेदन फॉर्म भरवाए गए थे। इन फॉर्म में अलग-अलग नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप था।
जांच के मुताबिक, ये लड़कियां मेडिकल छात्राएं नहीं थीं और परीक्षा में बैठने की पात्रता भी नहीं रखती थीं।
CBI के अनुसार, प्रत्येक डमी अभ्यर्थी को कथित तौर पर दो लाख रुपये तक दिए जाने की बात सामने आई थी। वाई. हरिप्रिया भी इन 14 डमी लड़कियों में शामिल थी।
हरिप्रिया ने परीक्षा नहीं दी थी
अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, हरिप्रिया खुद चंडीगढ़ आकर परीक्षा देने नहीं पहुंची थी। उसने किसी दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा भी नहीं दी थी।
उसके खिलाफ आरोप आवेदन फॉर्म भरने से संबंधित थे। इसी मामले में लंबे समय तक अदालत में पेश होने के बाद वह करीब छह साल तक गैरहाजिर रही।
2019 में घोषित हुई थी भगोड़ा
हरिप्रिया शुरुआत में अदालत में पेश होती रही, लेकिन बाद में उसने कोर्ट में उपस्थित होना बंद कर दिया। करीब छह साल तक पेशी से गैरहाजिर रहने के बाद वर्ष 2019 में अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया।
इसके बाद 10 सितंबर 2025 को उसे गिरफ्तार किया गया। करीब चार महीने जेल में रहने के बाद उसे 15 जनवरी 2026 को जमानत मिली।
अब अदालत में उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने उसकी पहले से काटी गई हिरासत को सजा मानते हुए मामले में जुर्माने के साथ फैसला सुनाया।
31 अन्य आरोपितों पर केस जारी
इस मामले में हरिप्रिया के अलावा 31 अन्य आरोपित हैं। इनके खिलाफ करीब 14 साल से मुकदमा चल रहा है। तीन आरोपितों को अदालत पहले ही भगोड़ा घोषित कर चुकी है।
पुराने इस मामले में हरिप्रिया के दोष स्वीकार करने और सजा पूरी माने जाने के बाद अब बाकी आरोपितों के खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।
