राजनीतिराज्य

पंजाब में पंथक राजनीति में बड़ा बदलाव अमृतपाल और अकाली दल में समझौता

पंजाब की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है जहां पंथक दलों के बीच नए समीकरण बनने की शुरुआत हो गई है। शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) और खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह के संगठन के बीच संभावित समझौते की खबर ने सियासी हलचल तेज कर दी है। पार्टी के प्रधान ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह गठजोड़ पंथक एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी का विजन डॉक्यूमेंट और सिद्धांत किसी भी गठबंधन के बावजूद नहीं बदलेंगे।

विजन डॉक्यूमेंट में पंथक सिद्धांतों पर जोर और नई दिशा

चंडीगढ़ प्रेस क्लब में विजन डॉक्यूमेंट जारी करते हुए ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी आनंदपुर साहिब प्रस्ताव को अपने मूल आधार के रूप में मानती है और इस पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी का उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना नहीं बल्कि पंथक मर्यादा और सिद्धांतों की रक्षा करना है। साथ ही उन्होंने पंजाब की गिरती आर्थिक स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि कर्जमुक्ति के वादों के बावजूद राज्य का कर्ज बढ़ता जा रहा है। युवाओं में दिशा की कमी और सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव को भी उन्होंने गंभीर मुद्दा बताया।

पंजाब में पंथक राजनीति में बड़ा बदलाव अमृतपाल और अकाली दल में समझौता

युवाओं और महिलाओं को बड़ी हिस्सेदारी देने का ऐलान

पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में संगठन को नया स्वरूप देने का भी संकल्प लिया है। इसके तहत 40 प्रतिशत हिस्सेदारी युवाओं को और 35 प्रतिशत महिलाओं को देने की घोषणा की गई है। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि पार्टी के उम्मीदवार “साबत सूरत” सिख होंगे जिससे पंथक पहचान और मर्यादा को बनाए रखा जा सके। उन्होंने गुरु नानक देव जी के “किरत करो” सिद्धांत को अपनाने की बात कही और समाज को मेहनत और ईमानदारी के रास्ते पर चलने का संदेश दिया। साथ ही उन्होंने चुनाव चिन्ह “तक्कड़ी” को लेकर अपने संघर्ष को जारी रखने की बात भी दोहराई।

नशे और राजनीतिक मुद्दों पर तीखा हमला, गठबंधन के संकेत

इस मौके पर पार्टी नेता इकबाल सिंह झुंदा ने भी कई अहम मुद्दों को उठाया। उन्होंने पंजाब में बढ़ते नशे के कारोबार और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव लंबे समय से न होने पर सवाल उठाए। केंद्र सरकार और भाजपा पर भी उन्होंने निशाना साधा। वहीं भाजपा के साथ संभावित गठबंधन को लेकर ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि जो भी पार्टी पंजाब और सिखों के मुद्दों को स्वीकार करेगी उसके साथ समझौते पर विचार किया जा सकता है। इस बयान ने आने वाले समय में पंजाब की राजनीति में नए गठजोड़ और बदलाव के संकेत दे दिए हैं।

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