
उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल तेजी से गर्म होता जा रहा है। सभी दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी बीच योगी सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लंबी पोस्ट साझा करते हुए अखिलेश यादव और उनके समर्थकों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल और बढ़ गई है।
पांच घटनाओं का हवाला देकर लगाए गंभीर आरोप
ओमप्रकाश राजभर ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि पिछले पांच दिनों में प्रदेश के बहुजन समाज और गैर यादव पिछड़े वर्ग के खिलाफ पांच बड़ी घटनाएं हुई हैं। उन्होंने अमेठी में सपा विधायक महाराजी प्रजापति के साथ मारपीट, चंदौली में सपा जिलाध्यक्ष गार्गी पटेल के साथ मारपीट, रामजन्म राजभर की हत्या, धनराज मौर्य और सूर्या चौहान हत्याकांड तथा लखनऊ में संदीप सिंह की हत्या का जिक्र किया। राजभर का आरोप है कि इन मामलों में शामिल लोग समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए हैं और अखिलेश यादव इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतने गंभीर मामले सामने आए हैं तो सपा प्रमुख ने अब तक कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी।

PDA मॉडल पर उठे सवाल और राजनीतिक बयानबाजी तेज
राजभर ने सीधे तौर पर अखिलेश यादव के PDA यानी पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक फॉर्मूले पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अगर गरीबों और पिछड़े वर्ग के लोगों के खिलाफ लगातार घटनाएं होती रहें और विपक्षी नेता चुप रहें तो सामाजिक न्याय के दावे पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन घटनाओं पर न तो कोई संवेदना जताई गई और न ही किसी पीड़ित परिवार को सांत्वना दी गई। इसके साथ ही उन्होंने 2015 के दादरी मामले का भी जिक्र करते हुए कहा कि उस समय अखलाक की मौत पर सरकार ने संवेदनशीलता दिखाई थी लेकिन अब हालात अलग हैं।
व्यक्तिगत बयान और राजनीतिक कटाक्ष से बढ़ा विवाद
अपने बयान में ओमप्रकाश राजभर ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन का भी उल्लेख किया और कहा कि उन्होंने टेम्पू चलाकर जीवन बिताया है और दलितों और पिछड़ों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है। उन्होंने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने गरीबी और संघर्ष का वास्तविक अनुभव नहीं देखा है। राजभर ने आगे यह भी कहा कि अखिलेश यादव केवल ट्विटर एसी और प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित नेता हैं। उनके इस बयान को लेकर सियासी विवाद और तेज हो गया है और दोनों दलों के बीच टकराव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
यूपी की राजनीति में बढ़ी नई सियासी खींचतान
इस पूरे घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर नई खींचतान देखने को मिल रही है। चुनाव से पहले इस तरह के बयान राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस विवाद पर और भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। फिलहाल दोनों दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है और राजनीतिक माहौल और अधिक गरमाता जा रहा है।