
पंजाब सरकार ने निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों द्वारा की जाने वाली मनमानी फीस वृद्धि पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडिड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को मंजूरी दे दी गई। इस संशोधन का उद्देश्य विद्यार्थियों और अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत देना और फीस निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
5 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाने पर लेनी होगी मंजूरी
नए संशोधन के तहत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल अब सालाना फीस में अधिकतम 5 प्रतिशत तक ही वृद्धि कर सकेंगे। यदि कोई स्कूल इससे अधिक फीस बढ़ाना चाहता है तो उसे पहले नियामक संस्था (रेगुलेटरी बॉडी) से अनुमति लेनी होगी। सरकार का मानना है कि इससे स्कूलों द्वारा की जाने वाली मनमानी फीस वृद्धि पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा और अभिभावकों के हितों की रक्षा होगी। संशोधन में फीस, फीस वृद्धि और कुल फीस वृद्धि की परिभाषाओं को भी अधिक स्पष्ट किया गया है।
उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नीति में बदलाव
कैबिनेट ने औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से 13 नवंबर 2019 के दिशा-निर्देशों में संशोधन को भी मंजूरी दी है। नई व्यवस्था के तहत पात्र औद्योगिक इकाइयों को निर्धारित शर्तें पूरी करने और आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद पूंजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy) प्रदान की जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और औद्योगिक इकाइयों को राहत मिलेगी।

डिजिटल गवर्नेंस को मिलेगा बढ़ावा
राज्य में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्टेट डाटा इंटीग्रेशन प्लेटफॉर्म (SDIP) लागू करने पर भी सहमति बनी है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए विभिन्न सरकारी विभागों के डाटाबेस को आपस में जोड़ा जाएगा, जिससे कार्यों में दोहराव कम होगा और सेवाएं अधिक तेज व पारदर्शी बनेंगी। इसके संचालन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में तीन स्तरीय समिति गठित की जाएगी।
दसूहा क्षेत्र को मिली प्रशासनिक सौगात
कैबिनेट ने जिला होशियारपुर के अंतर्गत आने वाले दसूहा सब-डिवीजन में अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (जनरल) और सहयोगी स्टाफ के पांच नए पद सृजित करने को भी मंजूरी दी है। इससे स्थानीय लोगों को राजस्व, प्रशासनिक कार्यों, जन शिकायतों और विभिन्न सरकारी अनुमतियों के लिए जिला मुख्यालय तक लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से प्रशासनिक सेवाएं लोगों के और करीब पहुंचेंगी तथा जनहित के मामलों का तेजी से निपटारा हो सकेगा।