
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पार्टी के भीतर कथित रूप से वायरल हो रहे एक निष्कासन पत्र को पूरी तरह फर्जी करार दिया है। यह मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सामने आया, जहां शनिवार रात 25 अप्रैल को उन्होंने स्पष्ट बयान जारी किया। इस वायरल पत्र में कुछ वरिष्ठ नेताओं को पार्टी से निष्कासित किए जाने का दावा किया गया था, जिसे मायावती ने गलत और भ्रामक बताया है। इस घटना ने बसपा के भीतर और राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
मायावती ने दी आधिकारिक स्थिति और स्पष्ट किया पक्ष
मायावती ने अपने बयान में कहा कि पार्टी द्वारा कुछ नेताओं के निष्कासन की आधिकारिक प्रक्रिया पहले ही पूरी कर दी गई थी, जिसमें जिला गाजियाबाद और बुलंदशहर स्तर पर कार्रवाई की गई थी। उन्होंने बताया कि जय प्रकाश सिंह और धर्मवीर सिंह अशोक को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते निष्कासित किया गया था, जिसकी जानकारी मीडिया में पहले ही प्रकाशित हो चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके बाद जो एक और पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, वह पूरी तरह फर्जी है और उसका पार्टी से कोई संबंध नहीं है।

फर्जी पत्र पर सख्त चेतावनी और मीडिया को अपील
बसपा प्रमुख ने फर्जी पत्र को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि इस तरह की झूठी और भ्रामक सूचनाओं पर किसी भी स्तर पर ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने मीडिया संस्थानों से भी अपील की कि वे बिना पुष्टि के किसी भी खबर को प्रकाशित न करें। मायावती ने कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं का तेजी से प्रसार हो रहा है, इसलिए पत्रकारिता में सत्यापन बेहद जरूरी है। उन्होंने इसे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने की साजिश भी बताया।
बुलंदशहर इकाई के पत्र और विवाद की पृष्ठभूमि
इस विवाद के बीच बुलंदशहर बसपा इकाई द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र भी चर्चा में है, जिसमें धर्मवीर सिंह अशोक के निष्कासन का उल्लेख किया गया है। इस पत्र में आरोप लगाया गया कि संबंधित नेता पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता में लिप्त थे, जिसके चलते उन्हें चेतावनी देने के बावजूद सुधार नहीं हुआ। हालांकि, इसी नाम से जुड़े एक अन्य कथित पत्र को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई, जिसे मायावती ने फर्जी बताया है। इस पूरे घटनाक्रम ने पार्टी संगठन में आंतरिक अनुशासन और सूचना नियंत्रण पर सवाल खड़े कर दिए हैं।