
राजधानी लखनऊ में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद कानपुर जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में दिखाई दे रहा है। शहरभर में बेसमेंट में संचालित कोचिंग सेंटर, अस्पताल और आवासीय भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई तेज कर दी गई है। फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों को सील किया जा रहा है और अवैध निर्माणों पर भी शिकंजा कसा जा रहा है।
तीन दिनों में 54 इमारतें सील, 90 को नोटिस
प्रशासनिक कार्रवाई के तहत पिछले तीन दिनों में 54 इमारतों को सील किया गया है, जबकि 90 अन्य भवनों को नोटिस जारी किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक इस पूरी कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी जाएगी। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा मानकों से समझौता करने वालों के खिलाफ आगे भी अभियान जारी रहेगा।
800 कोचिंग सेंटर, लेकिन NOC सिर्फ 40 के पास
कानपुर के काकादेव समेत विभिन्न इलाकों में 800 से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि अग्निशमन विभाग के अनुसार इनमें से केवल 40 संस्थानों के पास ही वैध फायर एनओसी है। बाकी अधिकांश संस्थान बिना जरूरी सुरक्षा इंतजामों के संचालित हो रहे हैं, जिससे हजारों छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

KDA और संबंधित विभागों पर उठे सवाल
कार्रवाई के बीच कानपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी (KDA) और अन्य संबंधित विभागों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि वर्षों से अवैध निर्माण और नियमों के उल्लंघन के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अब जब हादसे के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ है तो लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या पहले ही निगरानी और सख्ती बरती जाती तो ऐसी नौबत नहीं आती।
ऑनलाइन क्लास की ओर लौटे छात्र
सीलिंग अभियान का असर कोचिंग संस्थानों पर भी पड़ा है। कई संचालकों ने फिलहाल ऑफलाइन कक्षाएं बंद कर दी हैं और छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं। इससे हजारों विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हुई है, हालांकि प्रशासन का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है।