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JPSC-JSSC आंदोलन पर पप्पू यादव का बड़ा बयान, हेमंत सरकार का किया जिक्र

झारखंड में JPSC, JSSC CGL और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। भूख हड़ताल, राजनीतिक समर्थन और सरकार-विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने इस मुद्दे को राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक बहस बना दिया है।

छात्र आंदोलन को मिल रहा व्यापक समर्थन

झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में छात्रों का प्रदर्शन जारी है। कई छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इस आंदोलन को अब विभिन्न संगठनों और युवाओं का भी समर्थन मिलने लगा है। बिरसा फिजिकल एकेडमी के तहत झारखंड पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों ने भी आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की है।

पप्पू यादव ने क्या कहा?

पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने गुरुवार को कहा कि झारखंड में बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वार्ता के लिए एक टीम का गठन किया है और सरकार आंदोलन का समाधान बातचीत के जरिए निकालने का प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ हर हाल में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

JPSC-JSSC आंदोलन पर पप्पू यादव का बड़ा बयान, हेमंत सरकार का किया जिक्र

बीजेपी ने सरकार पर साधा निशाना

छात्र आंदोलन को लेकर भारतीय जनता पार्टी भी लगातार सरकार पर हमलावर है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्र हितों की बात करने वाले नेताओं का रवैया झारखंड के मामले में अलग दिखाई दे रहा है। वहीं बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने आरोप लगाया कि यदि परीक्षा में अनियमितताएं हुई हैं तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और विपक्ष इस मुद्दे पर दोहरा रवैया अपना रहा है।

भूख हड़ताल जारी, कई नेताओं ने की मुलाकात

राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में कई छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आंदोलन को लेकर भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी छात्रों से मुलाकात कर चुके हैं। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से बातचीत कर उनका हालचाल जाना और आंदोलन को लेकर चिंता व्यक्त की।

अब सबकी नजर सरकार और छात्रों की वार्ता पर

छात्रों की मुख्य मांग प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई है। दूसरी ओर सरकार वार्ता के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत इस आंदोलन की आगे की दिशा तय कर सकती है।

झारखंड का छात्र आंदोलन अब केवल परीक्षा विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पारदर्शिता, भर्ती प्रक्रिया और युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। राजनीतिक बयानबाजी के बीच सबसे अहम सवाल यही है कि क्या सरकार और छात्रों के बीच बातचीत से ऐसा समाधान निकलेगा, जिससे युवाओं का भरोसा दोबारा कायम हो सके।

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