
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 10 वर्षीय बच्ची के अपहरण और हत्या के मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर डायल-112 में तैनात एक सिपाही को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस मामले में दुष्कर्म की आशंका समेत सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
अस्पताल से घर लौटते समय लापता हुई बच्ची
पुलिस के अनुसार, बच्ची अपनी बड़ी बहन को जिला अस्पताल में खाना देने गई थी, जो इलाज के लिए भर्ती थी। 28 जुलाई की रात घर लौटते समय वह लापता हो गई। परिवार ने काफी तलाश के बाद पुलिस में गुमशुदगी दर्ज कराई। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए कई पुलिस टीमों का गठन किया गया।
CCTV फुटेज से आरोपी तक पहुंची पुलिस
जांच के दौरान करीब 200 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। फुटेज में बच्ची अस्पताल से पैदल निकलती दिखाई दी, जबकि उसके पीछे पुलिस की वर्दी पहने एक सिपाही बाइक पर आता नजर आया। कुछ देर बातचीत के बाद बच्ची उसकी बाइक पर बैठ गई। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने डायल-112 में तैनात सिपाही अभिषेक यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस का कहना है कि पूछताछ में आरोपी ने अपराध स्वीकार किया और उसकी निशानदेही पर गुरुवार सुबह शव बरामद किया गया।

दुष्कर्म की आशंका, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
पुलिस को आशंका है कि बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के बाद उसकी हत्या की गई। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। शव मिलने के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।
आरोपी का रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
पुलिस के अनुसार, आरोपी सिपाही अभिषेक यादव वर्ष 2018 बैच का जवान है और वर्तमान में डायल-112 सेवा में तैनात था। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2025 में उस पर छेड़छाड़ का एक मामला दर्ज हुआ था, जिसके बाद उसे निलंबित कर जेल भेजा गया था। बाद में उसकी सेवा बहाल कर दी गई थी। अब उसके खिलाफ बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और उस पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने की भी तैयारी की जा रही है।
परिवार का दर्द और प्रशासन की चुनौती
पीड़ित परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। बच्ची के पिता ई-रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जबकि मां गर्भवती हैं। बड़ी बहन के अस्पताल में भर्ती होने के कारण बच्ची खाना देने गई थी और उसी दौरान यह घटना हुई। यह मामला महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
गोरखपुर की यह घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था दोनों के लिए गहरी चेतावनी है। यदि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में सिद्ध होते हैं, तो यह कानून के रक्षक पर लगे सबसे गंभीर आरोपों में से एक होगा। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पोस्टमार्टम तथा फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।