
उत्तराखंड की धामी सरकार ने ईंधन की बचत और ऊर्जा उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में तय किया गया कि खनन, सौर ऊर्जा और विद्युत परियोजनाओं से जुड़े प्रस्तावों को अब मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति 60 दिनों के भीतर मंजूरी देगी। सरकार का उद्देश्य ऊर्जा क्षेत्र में तेजी लाना और निवेश को प्रोत्साहित करना है। इसके साथ ही राज्य में पीएनजी कनेक्शन देने का काम मिशन मोड में चलाने का फैसला लिया गया है ताकि अधिक से अधिक घरों तक स्वच्छ ऊर्जा पहुंच सके।
सौर ऊर्जा और गोबर गैस को बढ़ावा देने पर जोर
कैबिनेट बैठक में पीएम सूर्यघर योजना और गोबर गैस परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने पर विशेष फोकस किया गया। इसके लिए पंचायती राज विभाग और ग्राम्य विकास विभाग को जरूरी निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार का मानना है कि गांवों में सौर ऊर्जा और गोबर गैस के उपयोग से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में भी बड़े कदम उठाने जा रही है ताकि किसानों की लागत घटे और जैविक उत्पादन को बढ़ावा मिल सके।

घरेलू पर्यटन और डेस्टिनेशन वेडिंग को मिलेगा नया प्रोत्साहन
धामी सरकार ने उत्तराखंड में घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी नई रणनीति तैयार की है। विरासत पर्यटन, धार्मिक पर्यटन, वेलनेस, ग्रामीण और ईको-टूरिज्म के व्यापक प्रचार-प्रसार का फैसला लिया गया है। राज्य में डेस्टिनेशन वेडिंग को बढ़ावा देने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया जाएगा ताकि आयोजकों को अनुमति लेने में आसानी हो। सरकार प्रवासी भारतीयों को भी उत्तराखंड में छुट्टियां बिताने के लिए प्रेरित करेगी। इसके लिए “मेरा भारत मेरा योगदान” जैसे जनजागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
सरकारी खर्च और तेल खपत कम करने पर भी बड़ा निर्णय
कैबिनेट ने सरकारी खर्च और ईंधन की खपत कम करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। जिन अधिकारियों के पास एक से अधिक विभाग हैं उन्हें एक दिन में केवल एक वाहन इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया है। परिवहन विभाग को सार्वजनिक बस सेवाओं की संख्या और क्षमता बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें। इसके अलावा खाद्य तेल की खपत घटाने के लिए स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी कैंटीनों में तेल के इस्तेमाल को सीमित करने का फैसला लिया गया है। सरकार का मानना है कि इन कदमों से ऊर्जा बचत के साथ लोगों की सेहत पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
