
हरियाणा सरकार के सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने एक अहम प्रशासनिक निर्णय लेते हुए निलंबित वरिष्ठ अधिकारी सतबीर सिंह कादियान की सेवाएं बहाल कर दी हैं। 15 अप्रैल 2026 को उन्हें उनके पद से निलंबित किया गया था, जिसके बाद विभागीय स्तर पर इस मामले को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। अब राज्यपाल की मंजूरी के बाद उनकी सेवा को तत्काल प्रभाव से पुनः शुरू कर दिया गया है। इस फैसले को प्रशासनिक हलकों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि सरकार जांच प्रक्रिया के साथ-साथ अधिकारियों को काम करने का अवसर भी देना चाहती है।
जांच जारी, बहाली से नहीं पड़ेगा कोई असर
सरकार द्वारा जारी आदेश में यह साफ किया गया है कि सतबीर सिंह कादियान की बहाली का उनकी चल रही विभागीय जांच पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। जांच प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी और सभी तथ्यों की गहराई से पड़ताल की जाएगी। यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाएगी। वहीं, बहाली का निर्णय यह भी दर्शाता है कि अंतिम निष्कर्ष आने से पहले किसी अधिकारी को पूरी तरह से दोषी नहीं माना जा सकता।

नई जिम्मेदारी के साथ कुरुक्षेत्र में तैनाती
बहाली के साथ ही कादियान का तबादला भी कर दिया गया है। अब उन्हें कुरुक्षेत्र स्थित हरियाणा सिंचाई अनुसंधान एवं प्रबंधन संस्थान में हेड स्पेशल और प्रिंसिपल डायरेक्टर के पद पर नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति विभागीय आवश्यकताओं और आंतरिक व्यवस्थाओं के तहत की गई है। नई जिम्मेदारी के तहत उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे अपने अनुभव का उपयोग करते हुए संस्थान के कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाएंगे। कुरुक्षेत्र जैसे महत्वपूर्ण केंद्र में उनकी तैनाती को एक रणनीतिक निर्णय के रूप में भी देखा जा रहा है।
भत्तों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर स्पष्टता
जारी आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि सतबीर सिंह कादियान को नियमों के अनुसार टीए और डीए यानी यात्रा और दैनिक भत्ता प्रदान किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट होता है कि उनकी सेवा बहाली पूरी तरह से नियमित प्रक्रिया के तहत की गई है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले सरकारी तंत्र में संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी होते हैं। एक ओर जहां जांच जारी रहती है, वहीं दूसरी ओर अधिकारी को कार्य करने का अवसर भी मिलता है, जिससे विभागीय कार्य प्रभावित नहीं होते।
