
बिहार सरकार ने राज्य के सड़क नेटवर्क को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब नेशनल हाईवे की तर्ज पर राज्य के स्टेट हाईवे (SH) पर भी टोल टैक्स वसूला जाएगा। इसके लिए बिहार पथ कर नियमावली, 1979 की संबंधित धाराओं में संशोधन को मंजूरी दे दी गई है। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से सड़क रखरखाव और बुनियादी ढांचे के विकास को गति मिलेगी।
वाहनों के लिए तय हुई नई टोल दरें
कैबिनेट के फैसले के अनुसार अलग-अलग श्रेणी के वाहनों के लिए अलग-अलग टोल दरें निर्धारित की गई हैं। वैन, कार और जीप जैसे हल्के वाहनों से 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर, छोटे व्यावसायिक वाहनों से 2 रुपये प्रति किलोमीटर, दो एक्सल वाले ट्रक और बसों से 4.25 रुपये प्रति किलोमीटर वसूले जाएंगे। वहीं पोकलेन, डंपर जैसे भारी निर्माण वाहनों के लिए 6.65 रुपये प्रति किलोमीटर और सात या उससे अधिक एक्सल वाले बड़े वाहनों के लिए 8.10 रुपये प्रति किलोमीटर की दर तय की गई है।

FASTag से होगी टोल वसूली, मिलेगी रियायत भी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि टोल टैक्स की वसूली FASTag या अन्य स्वीकृत इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली के माध्यम से की जाएगी। जिन वाहनों में FASTag नहीं होगा, उनसे अधिक शुल्क लिया जाएगा। इसके अलावा ओवरलोड वाहनों पर भी अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। सरकार ने कुछ विशेष श्रेणियों के वाहनों के लिए छूट, रियायती पास और बहु-यात्रा (Multi-trip) रियायत का भी प्रावधान किया है।
विपक्ष ने फैसले का किया विरोध
बिहार सरकार के इस फैसले का विपक्ष ने विरोध शुरू कर दिया है। आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि राज्य राजमार्गों पर टोल टैक्स लगाना जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने जैसा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस निर्णय को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि अगर स्टेट हाईवे पर टोल लगाया जाएगा तो आगे चलकर अन्य सड़कों पर भी शुल्क वसूला जा सकता है। अब इस फैसले को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।
