सूडान स्टील प्लांट हादसा: चौरी चौरा के धर्मेंद्र यादव की मौत, तीन बेटों को अब भी पिता के लौटने का इंतजार

सूडान के एक स्टील प्लांट में भट्ठी में हुए ब्लास्ट ने गोरखपुर के चौरी चौरा के एक परिवार की खुशियां छीन लीं। नाइट शिफ्ट में ड्यूटी करने गए धर्मेंद्र यादव हादसे का शिकार हो गए। परिवार को मंगलवार दोपहर उनकी मौत की सूचना मिली। अब पत्नी और तीनों बेटे उनके पार्थिव शरीर के घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
आखिरी बार रात 10 बजे हुई थी बात
धर्मेंद्र की पत्नी अनीता देवी के मुताबिक, सोमवार रात करीब 10 बजे फोन पर पति से आखिरी बार बातचीत हुई थी। उस दौरान धर्मेंद्र ने पत्नी से परिवार और बच्चों का हाल जाना।
उन्होंने बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंता जताई और कहा कि उनकी पढ़ाई-लिखाई में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए। इसके बाद धर्मेंद्र ने बताया कि वह कंपनी में नाइट शिफ्ट की ड्यूटी के लिए जा रहे हैं और वापस आने के बाद फोन करेंगे।
लेकिन यह फोन परिवार के लिए आखिरी बातचीत साबित हुआ।
तीनों बेटे पूछ रहे, ‘पापा कब आएंगे?’
धर्मेंद्र यादव के तीन बेटे हैं। सबसे बड़े पवन यादव की उम्र 13 वर्ष, नैतिक यादव 12 वर्ष और अंश यादव 10 वर्ष के हैं।
पिता की मौत की खबर सुनने के बाद तीनों बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्हें अब भी भरोसा है कि उनके पिता घर लौट आएंगे। तीनों बार-बार अपनी मां से पूछ रहे हैं—“मम्मी, पापा घर कब आएंगे?”

बच्चों के इस सवाल का अनीता देवी के पास कोई जवाब नहीं है। वह उन्हें देखकर खुद भी टूट जाती हैं। परिवार के साथ गांव के लोग भी इस दर्दनाक स्थिति को देखकर भावुक हैं।
बड़े बेटे ने सरकार से लगाई गुहार
पिता को खोने के गम के बीच बड़े बेटे पवन यादव ने भारत सरकार और सूडान स्थित कंपनी से अपने पिता का शव जल्द भारत लाने की मांग की है।
परिवार चाहता है कि जरूरी औपचारिकताएं जल्द पूरी हों और धर्मेंद्र यादव का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव बिलारी लाया जाए, ताकि परिवार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कर सके।
परिवार के सामने खड़ी हुई बड़ी चुनौती
धर्मेंद्र की मौत के बाद पत्नी अनीता देवी और तीनों बच्चों के सामने परिवार चलाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। बच्चों की पढ़ाई और घर की जिम्मेदारियों का बोझ अब अनीता देवी के सामने है।
परिजन चाहते हैं कि भारत सरकार और संबंधित कंपनी इस मामले में जल्द कार्रवाई करे और शव को सुरक्षित भारत लाने की प्रक्रिया में परिवार की मदद करे।
गांव में पसरा मातम
धर्मेंद्र की मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, माहौल गमगीन हो गया। जिस घर में बच्चों की आवाज और रोजमर्रा की जिंदगी थी, वहां अब इंतजार और सन्नाटा है।
परिवार के लिए सबसे मुश्किल घड़ी वह है जब बच्चे मासूमियत से अपने पिता के लौटने का सवाल पूछते हैं। उनके पास पिता की यादें हैं और उनके पार्थिव शरीर के घर आने का इंतजार।
सूडान के स्टील प्लांट में हुए हादसे ने धर्मेंद्र यादव के परिवार से उनका सहारा छीन लिया। तीन मासूम बेटे अपने पिता की राह देख रहे हैं और पत्नी अनीता देवी सदमे में हैं। अब परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद भारत सरकार और संबंधित कंपनी से है कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर धर्मेंद्र का पार्थिव शरीर जल्द उनके घर पहुंचाया जाए।