
बिहार के मधुबनी जिले में वक्फ भूमि को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है, जहां अधिवक्ता सह जिला औकाफ कमिटी के सदस्य डॉ. मो. महताब आलम ने बिहार राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड, पटना के अध्यक्ष को पत्र लिखकर अवैध जमाबंदियों को रद्द करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने इस पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री को भी भेजी है। यह मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
21 अंचलों में अवैध जमाबंदी का आरोप, जांच की मांग तेज
डॉ. आलम ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि मधुबनी जिले के 21 अंचलों में वक्फ की भूमि पर अवैध तरीके से जमाबंदियां तैयार की गई हैं। उनका कहना है कि यह न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि वक्फ संपत्तियों के अधिकारों को भी प्रभावित करता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इन सभी मामलों की गहन जांच कर तुरंत अवैध जमाबंदियों को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाए ताकि सरकारी और धार्मिक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

जनता से भी की अपील, कानूनी कार्रवाई का रास्ता बताया
डॉ. मो. महताब आलम ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि किसी के पास वक्फ भूमि से संबंधित वैध दस्तावेज या प्रमाण हैं तो वे सीधे अपर समाहर्ता के न्यायालय में जमाबंदी रद्दीकरण का वाद दाखिल करें। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी भी व्यक्ति ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जा किया है तो उसके खिलाफ संबंधित थाना में एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। उनका कहना है कि कानून के दायरे में रहकर ही इस समस्या का समाधान संभव है।
वक्फ संपत्ति को ‘अमानत’ बताते हुए सुरक्षा की अपील
डॉ. आलम ने अपने बयान में कहा कि वक्फ की जमीन केवल एक संपत्ति नहीं बल्कि ‘अल्लाह की अमानत’ है, जिसकी सुरक्षा करना हर जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ सख्त अतिक्रमण वाद चलाकर वक्फ की जमीन को मुक्त कराया जाना चाहिए। इस पूरे मामले ने स्थानीय स्तर पर प्रशासन को भी सक्रिय कर दिया है और अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और वक्फ बोर्ड इस पर क्या कार्रवाई करते हैं।