
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और वैश्विक तनाव के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की अपील की थी। उन्होंने लोगों से ज्यादा से ज्यादा पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने और निजी वाहनों का कम उपयोग करने को कहा था ताकि ईंधन की बचत हो सके और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम पड़े। लेकिन इसी बीच मध्यप्रदेश से सामने आई एक तस्वीर ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के नवनियुक्त अध्यक्ष Saubhagya Singh Thakur अपने पदभार ग्रहण समारोह के लिए उज्जैन से भोपाल तक सैकड़ों गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे। बताया जा रहा है कि समर्थकों का बड़ा समूह अलग-अलग वाहनों में राजधानी पहुंचा। सड़क पर लंबा काफिला निकलने से भोपाल के कई इलाकों में ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। अब इस पूरे मामले ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
भोपाल की सड़कों पर लंबा काफिला, घंटों जाम में फंसे लोग
राजधानी Bhopal में पदभार ग्रहण कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों वाहनों का काफिला लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया। कई इलाकों में ट्रैफिक की रफ्तार धीमी पड़ गई और आम नागरिक घंटों जाम में फंसे रहे। सोशल मीडिया पर भी इस काफिले के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें सड़क पर लंबी लाइन में चलती गाड़ियां दिखाई दे रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब देश के प्रधानमंत्री खुद ईंधन बचाने की अपील कर रहे हैं तब नेताओं के इस तरह के भव्य काफिले आम जनता के बीच गलत संदेश देते हैं। लोगों ने सवाल उठाया कि क्या नियम और अपील सिर्फ आम नागरिकों के लिए हैं या फिर नेताओं को भी उनका पालन करना चाहिए। इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक आचरण दोनों पर बहस छेड़ दी है।

कांग्रेस ने BJP को घेरा, नेताओं के व्यवहार पर उठाए सवाल
इस पूरे मामले को लेकर Indian National Congress ने बीजेपी और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद Rajeev Shukla ने कहा कि क्या बीजेपी नेताओं ने प्रधानमंत्री की अपील नहीं सुनी जो छोटे से कार्यक्रम के लिए 700 गाड़ियों का काफिला लेकर भोपाल पहुंच गए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा नेताओं के लिए शायद सभी नियम माफ हैं। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता राहुल राज ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि क्या सारे नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि नेताओं को भी सार्वजनिक रूप से ईंधन बचाने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता Shama Mohamed ने भी सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाया और कहा कि प्रधानमंत्री खुद भी लगातार रैलियां कर रहे हैं जबकि जनता से ईंधन बचाने की अपील की जा रही है।
राजनीति हुई गर्म, BJP की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस घटना के सामने आने के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष इसे प्रधानमंत्री की अपील और नेताओं के व्यवहार के बीच साफ विरोधाभास बता रहा है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार एक तरफ जनता से सादगी और बचत की बात करती है जबकि दूसरी तरफ नेताओं के कार्यक्रमों में भारी संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है। फिलहाल बीजेपी की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है लेकिन सोशल मीडिया पर बहस लगातार तेज होती जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है क्योंकि देशभर में पहले से ही ईंधन की कीमतें और आर्थिक दबाव चर्चा का विषय बने हुए हैं। अब सवाल यही उठ रहा है कि क्या नेताओं को भी वही उदाहरण पेश नहीं करना चाहिए जिसकी अपेक्षा आम जनता से की जाती है।
