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चंडीगढ़ कोर्ट में पेश हुए सुखबीर बादल, कोटकपूरा गोलीकांड केस ने फिर पकड़ा सियासी तूल

पंजाब की राजनीति के सबसे चर्चित मामलों में शामिल कोटकपूरा गोलीकांड केस एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। शिरोमणि अकाली दल के प्रधान Sukhbir Singh Badal मंगलवार को अन्य आरोपियों के साथ चंडीगढ़ की अदालत में पेश हुए। यह पेशी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुई। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई फरीदकोट से ट्रांसफर कर चंडीगढ़ सेशन कोर्ट को सौंप दिया है। इससे पहले फरीदकोट की अतिरिक्त सत्र अदालत ने 2 मई को आदेश जारी कर सभी आरोपियों को 12 मई को चंडीगढ़ कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए थे। अदालत ने साफ कहा था कि अब कोटकपूरा फायरिंग और उससे जुड़े सभी मामलों की सुनवाई एक ही अदालत में होगी। इस घटनाक्रम के बाद पंजाब की सियासत में हलचल और तेज हो गई है। अकाली दल के विरोधी दल इस मामले को लेकर लगातार हमलावर बने हुए हैं जबकि अकाली दल इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार देता रहा है।

बेअदबी विरोध प्रदर्शन के दौरान चली थीं गोलियां

यह पूरा मामला 14 अक्टूबर 2015 के उस विवादित दिन से जुड़ा है जब पंजाब के बरगाड़ी और बुर्ज जवाहर सिंह वाला गांवों में हुई बेअदबी की घटनाओं के विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शनकारियों ने कोटकपूरा और बेहबल कलां में धरना दिया था। आरोप है कि उस दौरान पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए बल प्रयोग किया और गोलीबारी की। बेहबल कलां में पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई थी जबकि कोटकपूरा में कई लोग घायल हुए थे। घटना के बाद पूरे पंजाब में जबरदस्त गुस्सा फैल गया था और तत्कालीन सरकार की भूमिका पर सवाल उठे थे। यही मामला आगे चलकर पंजाब की राजनीति का सबसे संवेदनशील मुद्दा बन गया। कई जांच एजेंसियों और विशेष जांच दलों ने इस केस की पड़ताल की। इस दौरान कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं के नाम सामने आए। पूर्व डीजीपी Sumedh Singh Saini का नाम भी आरोपियों में शामिल किया गया।

चंडीगढ़ कोर्ट में पेश हुए सुखबीर बादल, कोटकपूरा गोलीकांड केस ने फिर पकड़ा सियासी तूल

हाईकोर्ट के फैसले से बदल गई सुनवाई की दिशा

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 9 अप्रैल को बड़ा फैसला सुनाते हुए इस मामले से जुड़ी कई एफआईआर को चंडीगढ़ ट्रांसफर करने का आदेश दिया था। अदालत ने माना कि जब जुड़े हुए दूसरे मामलों की सुनवाई पहले से ही चंडीगढ़ में चल रही है तो सभी मामलों का ट्रायल एक ही अदालत में होना चाहिए। हाईकोर्ट के आदेश के तहत 7 अगस्त 2018 को दर्ज एफआईआर भी चंडीगढ़ भेजी गई है। इसमें आईपीसी की धारा 307. 323. 341. 201. 218. 120-बी. 34 और आर्म्स एक्ट की धाराएं शामिल हैं। इन धाराओं में हत्या के प्रयास. आपराधिक साजिश. हिंसा और सबूत मिटाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अदालत के इस फैसले के बाद अब पूरे मामले की सुनवाई चंडीगढ़ सेशन कोर्ट में एक साथ होगी। कानूनी जानकारों का मानना है कि इससे केस की प्रक्रिया तेज हो सकती है और कई अहम खुलासे भी सामने आ सकते हैं।

पंजाब की राजनीति पर फिर बढ़ा दबाव

कोटकपूरा गोलीकांड मामला हमेशा से पंजाब की राजनीति में बड़ा मुद्दा रहा है। हर चुनाव में यह मामला चर्चा का केंद्र बनता रहा है। विपक्षी दल लगातार अकाली दल पर निशाना साधते रहे हैं जबकि अकाली दल खुद को निर्दोष बताता आया है। अब जब मामला चंडीगढ़ कोर्ट पहुंच गया है तो राजनीतिक दबाव फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। कोर्ट परिसर के बाहर भी इस केस को लेकर काफी हलचल देखने को मिली। कई लोगों की नजर अब आने वाली सुनवाई पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि इस केस में आगे की कार्रवाई पंजाब की राजनीति की दिशा पर असर डाल सकती है। आने वाले दिनों में अदालत में गवाहों और सबूतों को लेकर बहस और तेज हो सकती है। यही वजह है कि पूरे राज्य में इस बहुचर्चित केस को लेकर एक बार फिर चर्चाएं गर्म हैं।

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