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AI और डीपफेक का खतरनाक खेल! होटल व्यवसायी से 97 लाख की वसूली, ट्रैकर ने खोला पूरा राज

तकनीक जितनी तेजी से लोगों की जिंदगी आसान बना रही है, उतनी ही तेजी से साइबर अपराधियों के लिए नया हथियार भी बनती जा रही है। बिहार के मुजफ्फरपुर से सामने आया मामला इसी खतरे की एक बड़ी मिसाल है, जहां AI और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर एक होटल व्यवसायी को हनी ट्रैप में फंसाया गया और उससे 97 लाख रुपये ऐंठ लिए गए। हालांकि एक छोटी-सी तकनीकी चाल ने पुलिस को बड़ी सफलता दिला दी।

AI और डीपफेक से रचा गया ब्लैकमेल का जाल

पुलिस के अनुसार, अहियापुर थाना क्षेत्र के रहने वाले अभिषेक कुमार ने अपनी महिला मित्र और अन्य साथियों के साथ मिलकर होटल व्यवसायी को निशाना बनाया। आरोप है कि गिरोह ने AI और डीपफेक तकनीक की मदद से अश्लील फोटो और वीडियो तैयार किए और उन्हें वायरल करने की धमकी देकर करीब एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी। बदनामी के डर से पीड़ित लगातार आरोपियों की मांग पूरी करता रहा।

चार किस्तों में दिए 97 लाख रुपये

व्यवसायी ने अलग-अलग लोगों से कर्ज लेकर चार किस्तों में कुल 97 लाख रुपये आरोपियों को सौंप दिए। पहली किस्त में 30 लाख रुपये देने के बाद भी ब्लैकमेलिंग नहीं रुकी। ठगों ने मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और पटना के अलग-अलग स्थानों पर नकदी मंगवाई, जिससे पुलिस के लिए शुरुआती जांच और चुनौतीपूर्ण हो गई।
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10 हजार का ट्रैकर बना गेम चेंजर

आखिरी 20 लाख रुपये देने से पहले व्यवसायी ने लगभग 10 हजार रुपये का GPS ट्रैकर खरीदकर नोटों के एक बंडल में छिपा दिया। 15 जुलाई को रकम सौंपते ही उन्होंने पुलिस को सूचना दी। ट्रैकर की लोकेशन के आधार पर पुलिस ने अहियापुर क्षेत्र में छापेमारी कर 20 लाख रुपये और ट्रैकर वाला बैग बरामद कर लिया। हालांकि मुख्य आरोपी अभिषेक मौके से फरार हो गया।

दो हिरासत में, पुलिस की जांच जारी

पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, जबकि बाकी 77 लाख रुपये की बरामदगी और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है। बरामद नकदी की जानकारी आयकर विभाग को भी भेजी गई है। साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि व्यवसायी को किस तरह इस पूरे हनी ट्रैप में फंसाया गया।

मुजफ्फरपुर का यह मामला बताता है कि AI और डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग अब साइबर अपराध की नई चुनौती बन चुका है। किसी भी अनजान व्यक्ति से ऑनलाइन संपर्क, निजी तस्वीरें साझा करने या ब्लैकमेलिंग की धमकी मिलने पर तुरंत पुलिस और साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना ही सबसे सुरक्षित कदम है।

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